विदेशी शराब दुकानों में ‘स्टॉक आउट’: चर्चित अंग्रेजी ब्रांड्स के लिए तरसे शौकीन, सप्लाई रुकने से मचा हड़कंप
काउंटर से गायब हुए प्रीमियम ब्रांड्स के क्वार्टर और बोतलें; वेयरहाउस से सप्लाई चेन टूटने की वजह से खाली पड़े हैं दुकानों के रैक।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से शराब के शौकीनों के लिए एक बेहद निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। शहर की विदेशी शराब दुकानों से पिछले कुछ समय से चर्चित और प्रीमियम अंग्रेजी ब्रांड्स पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। अपने पसंदीदा ब्रांड की तलाश में काउंटर तक पहुंचने वाले ग्राहकों को खाली हाथ या फिर दूसरे विकल्पों के साथ समझौता कर लौटना पड़ रहा है। दुकानों में चुनिंदा और बड़े ब्रांड्स का स्टॉक न होने की वजह से शराब प्रेमियों में भारी मायूसी और नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर पड़ताल करने और अंग्रेजी शराब दुकानों में तैनात कर्मचारियों व सेल्समैनों से संपर्क करने पर इस किल्लत की असली वजह सामने आई है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि काउंटर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं है, बल्कि मुख्य डिपो और वेयरहाउस से ही चाहे गए प्रीमियम ब्रांड्स की सप्लाई (आपूर्ति) नहीं की जा रही है। सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण दुकानों तक माल पहुंच ही नहीं रहा है, जिसके चलते वे ग्राहकों को उनकी मांग के अनुरूप ब्रांड उपलब्ध कराने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
राजधानी रायपुर की प्रीमियम और सामान्य विदेशी मदिरा दुकानों में हर दिन हजारों की संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं। चर्चित ब्रांड्स की बोतलें न मिलने के कारण न केवल उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है, बल्कि दुकानों के दैनिक राजस्व पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। कई ग्राहकों का आरोप है कि पसंदीदा ब्रांड न मिलने के कारण उन्हें मजबूरन स्थानीय या कम लोकप्रिय ब्रांड्स की शराब ऊंचे दामों पर खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनके जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इस स्टॉक संकट को लेकर अब आबकारी विभाग के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। मदिरा प्रेमियों ने मांग की है कि प्रशासन and विभाग को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि सप्लाई व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जा सके। जानकारों का कहना है कि यदि वीकेंड और आगामी त्योहारों से पहले विदेशी शराब के चर्चित ब्रांड्स का स्टॉक री-स्टोर नहीं किया गया, तो शहर में शराब की अवैध बिक्री और तस्करी की शिकायतें भी बढ़ सकती हैं।



