खेती पर महंगाई की मार: सोसायटियों में खाद की किल्लत, खुले बाजार में यूरिया की ब्लैक मार्केटिंग से किसान परेशान
खरीफ सीजन की दस्तक के साथ कृषि गतिविधियां तेज, लेकिन दामापुर और पंडरिया के ग्रामीण अंचलों में खाद संकट और ऊंचे दामों ने तोड़ी अन्नदाताओं की कमर।

Bol Bharat 24 News: छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) जिले के पंडरिया विकासखंड से किसानों की समस्याओं को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। मानसून की दस्तक और खरीफ सीजन के शुरू होते ही दामापुर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी की गतिविधियां बेहद तेज हो गई हैं। खेत तैयार करने और बोआई की तैयारियों में जुटे अन्नदाताओं के सामने इस बार मौसम से भी बड़ी चुनौती कृषि संसाधनों की भारी कमी बनकर खड़ी हो गई है। क्षेत्र की सहकारी सोसायटियों में खाद की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिससे किसान दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय किसानों का आरोप है कि सेवा सहकारी समितियों (सोसायटियों) के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें जरूरत के मुताबिक यूरिया और अन्य आवश्यक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सरकारी केंद्रों में ‘स्टॉक नहीं है’ का बोर्ड लटकने के कारण मजबूरन किसानों को निजी दुकानों और खुले बाजार का रुख करना पड़ रहा है। सोसायटियों में खाद की इसी कमी का सीधा फायदा उठाकर खुले बाजार में खाद के बड़े कारोबारी और बिचौलिए यूरिया और डीएपी (DAP) की जमकर कालाबाजारी (ब्लैक मार्केटिंग) कर रहे हैं।
खुले बाजार में खाद की यह कमी कृत्रिम रूप से पैदा की गई है, जिसके चलते जमाखोर किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। निर्धारित सरकारी दरों से कहीं अधिक कीमत पर यूरिया बेचने की ‘लूट’ मची हुई है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के किसानों की खेती की लागत दोगुनी होती जा रही है। किसानों का कहना है कि एक तरफ सोसायटियों से उन्हें समय पर लोन और खाद नहीं मिल रही है, और दूसरी तरफ खुले बाजार में निजी विक्रेता मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें दोनों हाथों से लूट रहे हैं। इस दोहरी मार ने खरीफ की फसल लागत को आसमान पर पहुंचा दिया है।
इस विकट स्थिति को लेकर पंडरिया क्षेत्र के किसानों में स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि कृषि विभाग के आला अधिकारी तुरंत मैदानी स्तर पर दुकानों का औचक निरीक्षण करें और खाद की कालाबाजारी करने वाले जमाखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें। यदि समय रहते सोसायटियों में खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई और ऊंचे दामों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इस साल खरीफ की बोआई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर प्रदेश के कुल धान उत्पादन पर पड़ेगा।



