National Dance Competition:- शिमला में बस्तर की बेटियों का जलवा, राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में हासिल किया प्रथम स्थान
हिमाचल प्रदेश की राजधानी में आयोजित 71वीं अखिल भारतीय प्रतियोगिता में बस्तर की लोक संस्कृति का दिखा जादू; देश भर के कलाकारों को पछाड़कर छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान।

जगदलपुर: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों और राजधानी शिमला में आयोजित 71वीं अखिल भारतीय नाटक एवं नृत्य प्रतियोगिता (All India Drama and Dance Competition) में छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की बेटियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का ऐसा जलवा बिखेरा है कि पूरा देश उनकी प्रस्तुति का मुरीद हो गया है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे सैकड़ों मंझे हुए कलाकारों और नृत्य दलों के बीच बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक नृत्य ने प्रथम स्थान हासिल किया है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली जीत के साथ ही बस्तर की इन बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान और सम्मान दोनों बढ़ाया है।
ऑल इंडिया आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (All India Artists Association) की ओर से आयोजित इस भव्य राष्ट्रीय सांस्कृतिक महाकुंभ में बस्तर की बेटियों ने जैसे ही मंच संभाला, पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, बस्तरिया लोक संगीत, मांदरी की थाप और मनमोहक नृत्य मुद्राओं के जरिए न केवल निर्णायकों (जजेस) को प्रभावित किया, बल्कि वहां मौजूद देश-विदेश के दर्शकों का भी दिल जीत लिया। पांच दिनों तक चले इस कड़े और प्रतिष्ठित आयोजन में बस्तर की सांस्कृतिक विरासत सबसे अनोखी और अनूठी नजर आई।
बस्तर की लोक कला में प्रकृति, सामूहिकता और जीवन के उल्लास का जो अद्भुत ताना-बाना देखने को मिलता है, उसे इन बेटियों ने अपनी कोरियोग्राफी के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दिया। प्रतियोगिता के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में जजेस ने बस्तर के नृत्य दल को सर्वसम्मति से देश में पहला स्थान देने की घोषणा की। इस राष्ट्रीय मंच पर मिली जीत ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर की लोक कला और संस्कृति में वैश्विक स्तर पर लोगों को आकर्षित करने की असीम क्षमता है।
इस बड़ी और गौरवपूर्ण सफलता की खबर जैसे ही बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में पहुंची, कला प्रेमियों और आम नागरिकों में जश्न का माहौल व्याप्त हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग बस्तर की इन प्रतिभावान बेटियों को बधाई दे रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा है कि इन बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी कला को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर बस्तर का नाम पूरे देश में रोशन किया है।
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