Feature

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के पर्व से पहले भी थी रक्षा सूत्र की परंपरा, जानिए इंद्र की कलाई से जुड़ी पौराणिक कथा

Raksha Bandhan Story: इंद्र की कलाई पर बंधे रक्षासूत्र से जुड़ी है राखी की पुरानी कथा, जानिए कैसे बना भाई-बहन का पर्व

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख, समृद्धि व लंबी उम्र की कामना करती हैं। बदले में भाई बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेते हैं। हालांकि, रक्षाबंधन की परंपरा को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें देवराज इंद्र और उनकी पत्नी शची से जुड़ी कथा भी विशेष रूप से बताई जाती है।

देवताओं और असुरों के बीच हुआ था युद्ध

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक समय देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में असुरों का पलड़ा भारी पड़ने लगा और देवताओं को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। देवराज इंद्र भी इस स्थिति को लेकर चिंतित थे।

कथा के अनुसार, जब इंद्र युद्ध के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे, तब उनकी पत्नी शची ने उनकी सुरक्षा और विजय के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान किया। इसके बाद उन्होंने इंद्र की कलाई पर पवित्र रक्षासूत्र बांधा।

शची ने इंद्र की कलाई पर बांधा रक्षासूत्र

मान्यता है कि शची ने रक्षासूत्र बांधते हुए इंद्र की विजय और सुरक्षा की कामना की। इसके बाद इंद्र देवताओं की सेना के साथ युद्धभूमि में पहुंचे।

पौराणिक कथा में आगे बताया जाता है कि देवताओं ने असुरों का सामना किया और युद्ध में विजय प्राप्त की। इसी प्रसंग को रक्षासूत्र की प्राचीन परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

यहां यह समझना जरूरी है कि इंद्र-शची की कथा रक्षाबंधन से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता है, न कि आधुनिक भाई-बहन के रूप में रक्षाबंधन की ऐतिहासिक शुरुआत का प्रमाण।

पहले रक्षासूत्र का भाई-बहन से क्या संबंध था?

इंद्र और शची की कथा में शची ने अपने पति इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। यानी इस कथा में राखी का संबंध भाई-बहन के रिश्ते से नहीं, बल्कि रक्षा और मंगलकामना की भावना से दिखाई देता है।

समय के साथ रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा का सामाजिक स्वरूप बदलता गया और रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व बन गया। आज बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती है।

रक्षा सूत्र बना प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक

राखी का धागा छोटा जरूर है, लेकिन भारतीय परंपरा में इसके साथ भावनाओं का बड़ा अर्थ जुड़ा हुआ है। यह केवल भाई की ओर से बहन की रक्षा का वचन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति स्नेह, विश्वास, जिम्मेदारी और साथ निभाने का प्रतीक माना जाता है।

रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं, उपहार देते हैं और अपने रिश्ते को और मजबूत बनाने का संकल्प लेते हैं।

रक्षाबंधन से जुड़ी हैं कई पौराणिक कथाएं

रक्षाबंधन को लेकर केवल इंद्र और शची की कथा ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी तथा राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी कथाएं भी अलग-अलग परंपराओं में सुनाई जाती हैं।

इन कथाओं में घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन रक्षा, स्नेह और विश्वास की भावना समान दिखाई देती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन को केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों की भावनात्मक मजबूती से जुड़ा त्योहार भी माना जाता है।

भाई-बहन के रिश्ते का खास पर्व है रक्षाबंधन

आज रक्षाबंधन मुख्य रूप से भाई-बहन के प्रेम का पर्व बन चुका है। बहन राखी बांधती है और भाई उसके सम्मान, सुरक्षा और साथ का संकल्प लेता है। हालांकि, आधुनिक समय में इस रिश्ते की भावना एकतरफा नहीं रही है। भाई-बहन दोनों एक-दूसरे की खुशियों, मुश्किलों और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं।

इस तरह इंद्र और शची की पौराणिक कथा से जुड़ा रक्षासूत्र आज भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और मजबूत रिश्ते का प्रतीक बन गया है।

Related Articles

Back to top button