CG Diamond Mining: छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज; महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी ब्लॉक में लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग को मिली मंजूरी
NCL बोर्ड की दिल्ली बैठक में बड़ा फैसला, पन्ना प्लांट की जांच में मिल चुके हैं 5 प्राकृतिक हीरे; बैलाडीला डिपॉजिट-4 से 10 लाख टन लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य

रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ को देश के नक्शे पर एक प्रमुख हीरा उत्पादक राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित हाई-प्रोफाइल बैठक में महासमुंद जिले के ‘बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक’ में परियोजना के अगले और सबसे महत्वपूर्ण चरण को मंजूरी दे दी गई है। बोर्ड ने इस क्षेत्र में ‘लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग’ (Large Diameter Drilling) शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है, जिससे किम्बरलाइट पाइप में छिपे हीरों के वास्तविक और सटीक भंडार का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।
निदेशक मंडल की इस बैठक में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद और सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल सहित एनएमडीसी के शीर्ष अधिकारी अमिताभ मुखर्जी व आशीष चटर्जी मौजूद रहे। बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की तय समय-सीमा के भीतर सभी तकनीकी और वैज्ञानिक कार्य पूरे कर लिए जाएं। इस ड्रिलिंग के बाद एक विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार की जाएगी, जो इस ब्लॉक में व्यावसायिक (Commercial) हीरा खदान विकसित करने का आधार बनेगी।
पन्ना प्लांट की जांच में मिले 5 असली हीरे, बोत्सवाना-कनाडा जैसी उम्मीदें
बलौदा-बेलमुंडी ब्लॉक में हीरा होने की वैज्ञानिक पुष्टि पहले ही हो चुकी है। एनसीएल द्वारा किए गए शुरुआती भू-भौतिकीय सर्वेक्षण के बाद करीब 200 टन बल्क सैंपल निकाला गया था, जिसकी जांच मध्य प्रदेश के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में की गई। इस परीक्षण के दौरान 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक (असली) हीरे प्राप्त हुए। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे वैश्विक हीरा उत्पादक देशों की तरह ही छत्तीसगढ़ का यह ब्लॉक भी भविष्य में देश का सबसे बड़ा हीरा भंडार साबित हो सकता है।
बैलाडीला डिपॉजिट-4 से 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य
एनसीएल बोर्ड की इस बैठक में सिर्फ हीरे ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी गहन समीक्षा की गई। बैठक में तय किया गया कि बैलाडीला डिपॉजिट-4 से चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन आयरन ओर (लौह अयस्क) का उत्पादन किया जाएगा, जिसे आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष करने का टारगेट है। वहीं, बैलाडीला डिपॉजिट-13 को भी 1 करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि यह हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति को एक नए मुकाम पर ले जाएगी।


