छत्तीसगढ़

CG Forest Fire Alert System: आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा; छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वनाग्नि पर लगेगी रोक; 2 घंटे का काम अब मात्र 5 मिनट में होगा पूरा

रायपुर, 7 जुलाई 2026। जंगलों को आग (वनाग्नि) से बचाने और पर्यावरण सुरक्षा को पुख्ता करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ी तकनीकी कामयाबी हासिल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ‘ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम’ अब सूबे के जंगलों का डिजिटल प्रहरी बन चुका है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार की गई यह अत्याधुनिक प्रणाली वनाग्नि की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रही है, जिससे बहुमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिल रही है।

जंगल की आग का दुश्मन बना ‘सिस्टम संस्करण 2.0’

जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक धनंजय राठौर और सहायक जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार चंद्रवंशी के एक विशेष आलेख के अनुसार, भारत में भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के सहयोग से अब छत्तीसगढ़ में ‘फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0’ को पूरी तरह स्वचालित (Automated) कर दिया गया है।

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समय की भारी बचत: पहले पारंपरिक तरीकों से जंगलों में आग लगने की जानकारी अफसरों तक पहुंचने में 1 से 2 घंटे का समय लग जाता था, जिससे आग बड़े दायरे में फैल जाती थी।

अब 5 मिनट में अलर्ट: नई सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक की बदौलत अब आग लगने की सूचना महज 5 से 10 मिनट के भीतर संबंधित मैदानी स्टाफ तक पहुंच जाती है।

उपग्रह तकनीक और रियल टाइम मॉनिटरिंग से होगी सटीक कार्रवाई

कैसे काम करता है सिस्टम: यह पूरी प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह (Satellite) तकनीक पर काम करती है। उपग्रह जंगलों के तापमान में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव या थर्मल विसंगति को तुरंत पकड़ लेता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद जैसे ही आग की पुष्टि होती है, संबंधित वन मंडल, रेंज, और सीधे बीट गार्ड (फील्ड स्टाफ) के मोबाइल पर तत्काल एसएमएस (SMS) और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट चला जाता है।

इसके साथ ही, पूरे सिस्टम को जीआईएस (GIS) आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा गया है। इससे सीनियर अधिकारी दफ्तर में बैठकर आग की स्थिति देख सकते हैं। फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाता है और उसकी ‘जियो-टैग्ड’ ऑनलाइन प्रोग्रेस रिपोर्ट दर्ज करता है। इस डेटा से भविष्य के लिए संवेदनशील (Fire Prone) क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद मिल रही है।

तकनीक के साथ जनभागीदारी और पूर्व तैयारियां भी मजबूत

वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार सिर्फ तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि जंगलों को बचाने के लिए जनभागीदारी (कम्युनिटी इंवॉल्वमेंट) को भी बढ़ावा दे रही है। हर साल फायर सीजन शुरू होने से पहले वनों में फायर लाइन का निर्माण, ग्रामीणों के बीच जन-जागरूकता अभियान, मैदानी अमले को विशेष प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है। मंत्री कश्यप के अनुसार, छत्तीसगढ़ का यह ऑटोमेटेड मॉडल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मार्गदर्शक और प्रेरणादायी मॉडल साबित होगा।

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