Lakhpati Didi Campaign GPM News: महिलाओं की आर्थिक सशक्तता की नई पहचान बना जीपीएम; लखपति दीदी अभियान में लक्ष्य का 90 फीसदी हासिल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को संबल; बिहान मिशन और जिला प्रशासन के प्रयासों से हजारों दीदियों की आय में इजाफा

रायपुर, 7 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार की कोशिशें रंग ला रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत संचालित लखपति दीदी अभियान में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले ने एक बड़ी और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जीपीएम जिले ने चालू वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। यह सफलता ग्रामीण अंचल की महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचा जीपीएम जिला
जिला प्रशासन और बिहान मिशन से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया:
सालाना लक्ष्य: वित्तीय वर्ष में जिले को कुल 10 हजार 124 ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ (सालाना आय 1 लाख रुपये से अधिक) बनाने का टारगेट मिला था।
अब तक की उपलब्धि: जिला प्रशासन की मुस्तैदी से अब तक 9 हजार 95 महिलाएं लखपति दीदी बनने का गौरव और लक्ष्य हासिल कर चुकी हैं, जो कुल टारगेट का लगभग 90% है।
स्व-सहायता समूहों को मिला लाखों का लोन और बिजनेस सपोर्ट
मुख्यमंत्री का संकल्प: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के उस संकल्प को यह अभियान साकार कर रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश की बहनें केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित न रहें, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर राज्य के विकास में भागीदार बनें। इसी कड़ी में राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों (SHGs) को वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और मार्केट लिंकेज उपलब्ध करा रही है।
वर्तमान में जीपीएम जिले में 6 हजार 10 स्व-सहायता समूह पूरी तरह सक्रिय हैं। इन समूहों को आजीविका शुरू करने के लिए औसतन 1 लाख 92 हजार रुपये प्रति समूह का बैंक ऋण (लोन) उपलब्ध कराया गया है। इस राशि से ग्रामीण दीदियों ने कृषि आधारित गतिविधियों, उन्नत पशुपालन, लघु उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में कदम रखा है, जिससे उनकी मासिक और सालाना आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बदलाव का जरिया बना ‘लखपति दीदी अभियान’
कलेक्टर और जिला प्रशासन के सतत मार्गदर्शन में बिहान के अधिकारियों ने महिलाओं को सिर्फ लोन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें उद्यमिता विकास (Entrepreneurship), डिजिटल बैंकिंग सेवाओं और उत्पादों की बिक्री के लिए ‘सरस मेला’ व अन्य बाजार भी उपलब्ध कराए। यही वजह है कि आज वनांचल और ग्रामीण परिवेश से आने वाली महिलाएं सफल बिजनेस वुमन के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। इस अभियान ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ उनके भीतर नेतृत्व क्षमता (Leadership) और स्वयं निर्णय लेने के आत्मविश्वास को भी जगाया है, जो आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है।



