Rajasthan Manganiyar Community: ‘निंबोड़ा’ और ‘लाल-पीली अंखियां’ जैसे हिट गानों के पीछे है राजस्थान का ये खास समुदाय, हैरान कर देगी इनकी कहानी
बॉलीवुड के ब्लॉकबस्टर गानों को सुरों से सजाने वाले राजस्थान के 'मांगणियार' समुदाय का इतिहास और उनकी अनोखी संगीत परंपरा

Bol Bharat 24 News: राजस्थान की मरुभूमि सिर्फ अपने ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और संगीत विरासत के लिए भी जानी जाती है। बॉलीवुड के कई ऐसे सुपरहिट गाने हैं जिन्होंने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया, जैसे फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का ‘निंबोड़ा-निंबोड़ा’ और हालिया फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ का ट्रेंडिंग गाना ‘लाल-पीली अंखियां’। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन ब्लॉकबस्टर गानों की जड़ें राजस्थान के एक बेहद खास लोक संगीतकार समुदाय से जुड़ी हैं, जिसे ‘मांगणियार’ (Manganiyar Community) कहा जाता है। मरुस्थल के इस समुदाय की कहानी और संगीत के प्रति इनका समर्पण वाकई हैरान कर देने वाला है।
कौन हैं मांगणियार और क्या है इनका इतिहास?
मांगणियार मुख्य रूप से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जैसे बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर के मूल निवासी हैं।
अनोखी धार्मिक विरासत: मांगणियार समुदाय की सबसे खास बात यह है कि यह मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन इनका संगीत और जीवन पूरी तरह से हिंदू राजाओं, स्थानीय संरक्षकों (जिन्हें ‘जजमान’ कहा जाता है) और हिंदू देवी-देवताओं की स्तुति से जुड़ा रहा है।
पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर: यह एक वंशानुगत (Hereditary) संगीतकार समुदाय है। इनके बच्चे स्कूल जाने से पहले ही सुर और ताल की समझ विकसित कर लेते हैं। इनके संगीत की कला मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होती है।
‘कमायचा’ और ‘खड़ताल’ से बिखरते हैं जादुई सुर
पारंपरिक वाद्य यंत्र: मांगणियार गायकों की पहचान उनके खास वाद्य यंत्रों से होती है। इनमें सबसे प्रमुख है ‘कमायचा’ (Kamaycha), जो आम की लकड़ी के एक एकल टुकड़े से बना एक दुर्लभ तारवाला वाद्य यंत्र होता है और इसे बकरे की खाल से मढ़ा जाता है। इसकी गूंज बेहद सम्मोहक होती है। इसके अलावा, लकड़ी के टुकड़ों से बनी ‘खड़ताल’ (Khartal) को ये कलाकार इतनी तेजी और सटीकता से बजाते हैं कि देखने वाले दंग रह जाते हैं।
बॉलीवुड से लेकर इंटरनेशनल स्टेज तक का सफर
कभी राजस्थान के राजा-महाराजाओं और राजपूत दरबारों की शान बढ़ाने वाले मांगणियार कलाकार आज वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
जमीनी लोकगीत बने बॉलीवुड हिट: ‘निंबोड़ा’ मूल रूप से मांगणियार समुदाय का एक पारंपरिक लोकगीत है, जिसे शादियों और त्योहारों पर गाया जाता था। इसी तरह ‘लाल-पीली अंखियां’ भी सदियों पुराना राजस्थानी लोकगीत है, जिसे आधुनिक संगीत के साथ पिरोकर बॉलीवुड ने नया जीवन दिया।
अंतरराष्ट्रीय पहचान: पद्मश्री स्वर्गीय साकर खान मांगणियार (कमायचा वादक) और अनवर खान मांगणियार जैसे दिग्गजों ने इस संगीत को अमेरिका, यूरोप और दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया है। आज ‘द मांगणियार सेडक्शन’ जैसे अंतरराष्ट्रीय शोज़ दुनिया भर में हाउसफुल चलते हैं।
रेगिस्तान की तपती रेत के बीच अभावों में रहकर भी अपनी अनूठी कला को जीवित रखने वाले मांगणियार समुदाय की कहानी कला, समन्वय और अटूट सांस्कृतिक एकता की एक अद्भुत मिसाल है।



