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हिल स्टेशन जाना भूल जाएंगे! मानसून में जन्नत बन जाते हैं छत्तीसगढ़ के ये 5 खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट; आज ही बना लें ट्रिप का प्लान

बारिश की बूंदों के बीच छत्तीसगढ़ के इन पर्यटन स्थलों की खूबसूरती देख ठहर जाएंगी नजरें; हरी-भरी वादियों और झरनों का अद्भुत नजारा

रायपुर, 5 जुलाई 2026। भीषण गर्मी के बाद मानसून की पहली बारिश होते ही छत्तीसगढ़ की धरा पर हरियाली की चादर बिछ गई है। बारिश के इस सुहावने मौसम में यदि आप भी कहीं घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपको प्रदेश से बाहर किसी महंगे हिल स्टेशन जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। छत्तीसगढ़ में कई ऐसे अद्भुत और प्राकृतिक पर्यटन स्थल हैं, जो मानसून के दिनों में अपनी अलौकिक सुंदरता से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बादलों की लुका-छिपी और पहाड़ों से गिरते दूधिया झरनों के बीच, आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के उन 5 चुनिंदा टूरिस्ट स्पॉट्स के बारे में जो आपके इस मानसून ट्रिप को हमेशा के लिए यादगार बना देंगे:

1. चित्रकूट जलप्रपात (बस्तर) – ‘भारत का नियाग्रा’

बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित चित्रकूट जलप्रपात को ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है।

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क्यों है खास: मानसून के दिनों में इस जलप्रपात का रूप बेहद विशाल और रौद्र हो जाता है। करीब 90 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी की गर्जना और चारों ओर उड़ती पानी की फुहारें सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। बारिश में इसका मटमैला और विशाल स्वरूप इसकी असीमित शक्ति का अहसास कराता है।

2. मैनपाट (सरगुजा) – ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’

सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है, जिसे अपनी तिब्बती संस्कृति और ठंडे मौसम के कारण ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ भी कहा जाता है।

क्यों है खास: मानसून के दौरान मैनपाट की पहाड़ियां और घाटियां पूरी तरह से कोहरे (धुंध) की आगोश में समा जाती हैं। यहाँ का ‘उल्टा पानी’ (जहां पानी नीचे से ऊपर की ओर बहता है) और ‘दलदली’ (हिलती हुई जमीन) पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। बारिश में यहाँ का तापमान बेहद सुहावना हो जाता है।

3. तीरथगढ़ जलप्रपात (कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान)

बस्तर के जगदलपुर के पास कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात अपनी अनूठी बनावट के लिए जाना जाता है।

क्यों है खास: यह झरना किसी एक धारा में नहीं, बल्कि पहाड़ों की सीढ़ियों जैसी संरचना से होते हुए लगभग 300 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। मानसून में जब चारों ओर का घना जंगल पूरी तरह हरा-भरा हो जाता है, तब सफेद दूध की तरह बहता यह जलप्रपात किसी जादुई दृश्य जैसा प्रतीत होता है।

4. सतरेंगा और बुका (कोरबा) – ‘छत्तीसगढ़ का मॉरीशस’

कोरबा जिले में हसदेव बांगो बांध के बैकवाटर पर स्थित सतरेंगा और बुका जल पर्यटन के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं।

क्यों है खास: मानसून के मौसम में जब बांध का जलस्तर बढ़ता है, तो दूर-दूर तक फैला नीला पानी और उसके बीच छोटे-छोटे टापू किसी विदेशी डेस्टिनेशन का अहसास कराते हैं। बुका में लगे ट्री-हाउस और सतरेंगा में क्रूज व बोटिंग का आनंद बारिश के मौसम में दोगुना हो जाता है।

5. चैतुरगढ़ (कोरबा) – ‘छत्तीसगढ़ का कश्मीर’

लफागढ़ के पहाड़ों पर स्थित चैतुरगढ़ को ‘छत्तीसगढ़ का कश्मीर’ कहा जाता है। यह एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से बेहद सुदृढ़ किला क्षेत्र है, जहां मां महिषासुर मर्दिनी का प्रसिद्ध मंदिर भी है।

क्यों है丰富: समुद्र तल से ऊंचे पहाड़ों पर स्थित होने के कारण मानसून में यहाँ बादलों का डेरा रहता है। जब आप पहाड़ी रास्तों से होकर ऊपर जाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे आप बादलों के बीच तैर रहे हों। यहाँ की प्राकृतिक गुफाएं और हरी-भरी घाटियां प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान हैं।

ट्रेवल टिप्स (Travel Tips For Monsoon):

अंदरूनी इलाकों और झरनों के पास जाते समय स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों और चेतावनी बोर्ड का कड़ाई से पालन करें।

अचानक बढ़ने वाले जलस्तर को देखते हुए नदी या झरने के बहुत करीब जाने या तैरने की गलती न करें।

पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाते समय गति धीमी रखें, क्योंकि मानसून में विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो जाती है।

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