KTU में मंथन: “भारतीय संस्कृति और सत्यता ही पत्रकारिता का असली आधार”, AI के दौर में मीडिया की बदलती भूमिका पर चर्चा
रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में 'भारतीय ज्ञान परंपरा और पत्रकारिता की चुनौतियां' विषय पर आयोजित हुई विशेष गोष्ठी

रायपुर, 10 अगस्त। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (केटीयू), रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्य अउ पत्रकारिता: आज के चुनौती-कली बर दिशा’ विषय पर एक भव्य परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मीडिया जगत के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु वर्तमान डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता, भारतीय ज्ञान परंपरा और उसके नैतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना रहा।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब सूचनाएं तकनीक के माध्यम से पल भर में प्रसारित हो रही हैं, तब पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘सत्यता’ और ‘विश्वसनीयता’ बनाए रखने की है। उन्होंने जोर दिया कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्य ही वे आधारस्तंभ हैं, जो पत्रकारिता को सही दिशा दे सकते हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने स्वागत भाषण दिया और आयोग द्वारा भाषा-संस्कृति के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों और आगामी योजनाओं पर प्रकाश डाला।
परिचर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से उभरकर आई कि तकनीकी प्रगति चाहे कितनी भी क्यों न हो जाए, पत्रकारिता का मूल ‘जन-सरोकार’ और ‘संवेदनशीलता’ होना चाहिए। वक्ताओं ने युवाओं को सलाह दी कि वे आधुनिक तकनीकों जैसे AI का उपयोग तो करें, लेकिन भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई और मानवीय संवेदनाओं को कभी न भूलें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकारिता के छात्र-छात्राएं, प्राध्यापक और गणमान्य नागरिक मौजूद थे, जिन्होंने विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हुए मीडिया की नई चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।



