Parenting Tips: पेरेंट्स की ‘सही सलाह’ भी बच्चों को क्यों लगती है बुरी? वजह जानकर बदल जाएगा आपका तरीका
जानिए माता-पिता की सही सलाह भी बच्चों को बुरी क्यों लगती है और बच्चों से बात करते समय किन तरीकों को अपनाकर बेहतर संवाद और मजबूत रिश्ता बनाया जा सकता है।

Parenting Tips रायपुर। माता-पिता हमेशा चाहते हैं कि उनके बच्चे सही रास्ते पर चलें और जीवन में आगे बढ़ें। इसी वजह से वे बच्चों को समय-समय पर पढ़ाई, करियर, व्यवहार और दोस्तों को लेकर सलाह देते हैं। लेकिन कई बार वही सलाह, जो माता-पिता के लिए चिंता और प्यार का प्रतीक होती है, बच्चों को डांट या दबाव जैसी महसूस होने लगती है। इसका कारण केवल बच्चों का जिद्दी होना नहीं, बल्कि सलाह देने का तरीका और उसका समय भी हो सकता है।
बच्चों और माता-पिता के बीच पीढ़ियों का अंतर भी इस समस्या की एक बड़ी वजह है। माता-पिता अपने अनुभवों के आधार पर बच्चों को समझाने की कोशिश करते हैं, जबकि बच्चे अपने वर्तमान अनुभवों और परिस्थितियों के आधार पर चीजों को देखते हैं। ऐसे में जब उन्हें बार-बार बताया जाता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, तो उन्हें लग सकता है कि उनकी बात या भावनाओं को महत्व नहीं दिया जा रहा है।
सलाह से पहले बच्चों को समझना जरूरी
बच्चों को सलाह देने से पहले उनकी बात सुनना बेहद जरूरी है। अगर बच्चा किसी समस्या से परेशान है और माता-पिता तुरंत समाधान बताने लगते हैं, तो उसे महसूस हो सकता है कि उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की जा रही। ऐसे में पहले बच्चे को अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका देना चाहिए।
मसलन, अगर बच्चा परीक्षा में कम अंक आने से परेशान है, तो तुरंत यह कहना कि ‘तुमने मेहनत नहीं की’ उसकी परेशानी बढ़ा सकता है। इसके बजाय माता-पिता उससे पूछ सकते हैं कि उसे पढ़ाई में किस तरह की दिक्कत आई। इससे बच्चे को लगेगा कि माता-पिता उसे जज करने के बजाय समझने की कोशिश कर रहे हैं।
आदेश नहीं, बातचीत का तरीका अपनाएं
बच्चों के साथ बातचीत करते समय आदेश देने के बजाय विकल्प देना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। ‘तुम्हें ऐसा ही करना है’ कहने के बजाय ‘तुम्हें क्या लगता है, इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है?’ जैसे सवाल बच्चे को अपनी राय रखने का अवसर देते हैं।
इस तरह की बातचीत बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाती है। साथ ही उन्हें यह भी महसूस होता है कि माता-पिता उनकी सोच और राय का सम्मान करते हैं।
हर सलाह सही समय पर देना जरूरी नहीं
कई बार सलाह गलत नहीं होती, लेकिन उसका समय गलत होता है। बच्चा अगर पहले से तनाव, गुस्से या निराशा में है, तो उस समय लंबी सीख देने के बजाय उसे थोड़ा समय देना बेहतर हो सकता है। जब उसका मन शांत हो जाए, तब उसी विषय पर बातचीत अधिक सकारात्मक तरीके से की जा सकती है।
माता-पिता को यह समझना जरूरी है कि बच्चों को हर समस्या का तत्काल समाधान नहीं चाहिए होता। कई बार वे सिर्फ चाहते हैं कि कोई उनकी बात सुने और उनकी भावनाओं को समझे।
बच्चों को सलाह देते समय इन बातों का रखें ध्यान
पहले बच्चे की बात ध्यान से सुनें।
सलाह देने से पहले उसकी भावनाओं को समझें।
दूसरे बच्चों से तुलना करने से बचें।
बार-बार एक ही बात दोहराने के बजाय सही समय का इंतजार करें।
आदेश देने के बजाय बातचीत करें।
बच्चे की छोटी उपलब्धियों की भी सराहना करें।
गलती होने पर उसे अपमानित करने के बजाय सुधार का मौका दें।
बच्चे को अपनी राय और निर्णय रखने की स्वतंत्रता दें।
माता-पिता की सलाह बच्चों के जीवन को बेहतर दिशा दे सकती है, लेकिन इसके लिए सलाह से ज्यादा जरूरी है बातचीत का सही तरीका। जब बच्चों को लगेगा कि उनके माता-पिता उन्हें नियंत्रित करने के बजाय समझने और सहयोग करने की कोशिश कर रहे हैं, तो वे उनकी बात को ज्यादा सहजता से स्वीकार करेंगे। प्यार, भरोसे और संवाद के साथ दी गई सलाह बच्चों के लिए बोझ नहीं बल्कि मार्गदर्शन बन सकती है।



