छत्तीसगढ़

धरती ने ओढ़ी हरी चुनर: मानसून में बस्तर की ‘मिचनार घाटी’ बनी जन्नत, वादियां देखकर बार-बार आने का करेगा मन

रिमझिम फुहारों के बीच साल वनों के द्वीप में बिखरी नैसर्गिक छटा; झरनों के शोर और कल-कल बहती नदियों ने पर्यटकों को किया आकर्षित

NV News जगदलपुर, 30 जून 2026। प्रकृति के अनुपम उपहार और ‘साल वनों के द्वीप’ के नाम से विख्यात बस्तर की खूबसूरत वादियां मानसून काल की शुरुआत होते ही हरितिमा की चादर ओढ़ने लगी हैं। पहली मानसूनी बारिश की बूंदों ने मानो बस्तर की वादियों का अनोखा शृंगार कर दिया है, जिससे यहां के मैदानों से लेकर पहाड़ों और सघन वनों तक, चहुंओर प्रकृति खिल उठी है। बस्तर की सुप्रसिद्ध ‘मिचनार घाटी’ इस मौसम में किसी जन्नत से कम नहीं लग रही है, जिसकी बेमिसाल खूबसूरती को अपनी आंखों में कैद करने के लिए सैलानियों का तांता लगना शुरू हो गया है।

रिमझिम फुहारों के बीच बस्तर अंचल की कल-कल बहती नदियां और ऊंचे पहाड़ों से झर-झर गिरते झरने व जलप्रपात अब अपने पूरे शबाब पर आने लगे हैं। जलप्रपातों का बढ़ता शोर और चारों तरफ फैली घनी हरियाली सैलानियों को एक जादुई अहसास करा रही है। ऐसे सुहावने मौसम में रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से दूर प्रकृति की सैर करने और सुकून के पल बिताने के लिए बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी और सैलानी बस्तर की इन वादियों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग भी मानसून के इस सीजन में पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर मुस्तैद है। मिचनार घाटी के घुमावदार रास्तों और जलप्रपातों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि लोग सुरक्षित रहकर इस प्राकृतिक वैभव का आनंद ले सकें। मानसून के दिनों में बस्तर का यह रूप न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है।

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