‘बिरहोर जननायक’ पुस्तक का विमोचन: पद्मश्री जागेश्वर यादव का जीवन सेवा और समर्पण का उच्चतम आदर्श – टंक राम वर्मा
राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की पुस्तक; विशेष पिछड़ी जनजाति के उत्थान पर आधारित है कृति

CG News- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मश्री जागेश्वर यादव के संघर्षों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया है। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट कर उन्हें अपनी नई पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सौंपी। इस दौरान स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव भी उपस्थित रहे। मंत्री टंक राम वर्मा ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि जागेश्वर यादव का जीवन समाज सेवा, करुणा और मानवता का एक अनुपम उदाहरण है, जो युवाओं और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य मुलाकात की। इस विशेष अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री टंक राम वर्मा को पद्मश्री जागेश्वर यादव के प्रेरणादायी जीवन, सामाजिक संघर्षों और उपलब्धियों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की पहली प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी मुलाकात के दौरान स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव भी वहां मौजूद रहे, जिन्होंने मंत्री के साथ अपने चार दशकों के सामाजिक जीवन के गहरे और जमीनी अनुभवों को साझा किया।
मुलाकात के दौरान मंत्री टंक राम वर्मा ने पुस्तक का बारीकी से अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर बेहद प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए जागेश्वर यादव द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों की सराहना की। मंत्री ने कहा कि जागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है, जो समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने वाले हर व्यक्ति को राह दिखाएगा।

गौरतलब है कि पद्मश्री जागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही लगातार विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज इस अत्यंत पिछड़े समाज में शिक्षा के प्रति अलख जगी है और कई परिवार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति युवाओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज साबित होगी, जो उन्हें कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने और राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगी।



