छत्तीसगढ़

आपातकाल के योद्धाओं का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा; रायपुर में मुख्यमंत्री साय ने किया स्मारिका का विमोचन, निबंध प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित

डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान समारोह; डॉ. रमन सिंह और आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार रहे मौजूद

रायपुर: राजधानी रायपुर के डीडीयू (DDU) ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में एक गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने वाले और यातनाएं सहने वाले सेनानियों के संघर्ष पर आधारित विशेष स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह और नकद प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया।

समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार ने अपने व्याख्यान में राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि जीवन का मूल संस्कार है। उन्होंने आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा बताते हुए युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जीवन में अपनाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने साझा की अपने परिवार की भावुक स्मृतियां

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में आपातकाल के उस काले दौर को याद करते हुए अपने परिवार से जुड़ा एक बेहद भावुक संस्मरण साझा किया। सीएम साय ने बताया, “मेरे बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि साय उस दौरान पूरे 19 महीनों तक जेल में बंद रहे। मैंने उन परिवारों की पीड़ा को बहुत करीब से देखा है जिनके मुखिया को जेल में डाल दिया गया था और उनके सामने जीवन निर्वाह का संकट खड़ा हो गया था। उस कठिन समय में संघ के स्वयंसेवक भेष बदलकर सेनानियों के घरों में गुप्त रूप से अनाज पहुंचाया करते थे ताकि कोई परिवार भूखा न सोए।” मुख्यमंत्री ने इस गौरवशाली इतिहास को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्णय की सराहना की।

आपातकाल हमें सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है: डॉ. रमन सिंह

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि 1975 का आपातकाल, प्रेस सेंसरशिप और मौलिक अधिकारों का निलंबन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक भीषण चुनौती था, जिसने देश की जनता को अपने अधिकारों के प्रति हमेशा सजग रहने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के दौरान राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिसमें प्रदेशभर के 540 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। विद्यालय स्तर पर “आपातकाल कभी विस्मृत न हो” विषय में जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल (रायपुर) की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त कर ₹31,000 की पुरस्कार राशि जीती। वहीं, कॉलेज स्तर पर “25 जून : संविधान हत्या दिवस” विषय में रायपुर की सुश्री कल्याणी पटले प्रथम स्थान पर रहीं। इस बड़े आयोजन में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी सहित छत्तीसगढ़ के कई विधायक और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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