छत्तीसगढ़

CG Pulse Polio Campaign: मंत्री राजेश अग्रवाल ने लखनपुर से किया पल्स पोलियो अभियान का आगाज; प्रदेश में 36 लाख बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य

कैबिनेट मंत्री ने दिया नारा— 'दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार'; प्रदेशभर में 14 हजार से ज्यादा बूथ, घर-घर जाएगी टीम

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ में बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की जोरदार शुरुआत हो चुकी है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सरगुजा (अंबिकापुर) जिले के लखनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 0 से 5 वर्ष तक के नन्हे-मुन्नों को पोलियो की जीवनरक्षक दो बूंदें पिलाकर इस महाअभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अभिभावकों और आम नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ बचपन ही सशक्त भारत की आधारशिला है और “दो बूंद हर बार, पोलियो पर जीत बरकरार” के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने अभियान में जुटे स्वास्थ्य विभाग के अमले, मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संगठनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी जनभागीदारी से पोलियो पर विजय पाई है और इस उपलब्धि को बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि कोई बच्चा किसी कारणवश बूथ तक नहीं आ पाता है, तो माता-पिता घर-घर आने वाली टीम से संपर्क कर खुराक जरूर दिलवाएं।

छत्तीसगढ़ में 36 लाख और देश में 17 करोड़ बच्चों का लक्ष्य

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छत्तीसगढ़ में 28 जून से 30 जून 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य के करीब 35 लाख 98 हजार 904 (लगभग 36 लाख) बच्चों को दवा पिलाने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है।

बूथ और मैनपावर: पहले दिन (28 जून) दवा पिलाने के लिए पूरे प्रदेश में 14,396 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। इस काम के लिए 28,791 टीमें और 57 हजार से अधिक मैदानी स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं।

घर-घर दस्तक: जो बच्चे पहले दिन बूथ तक नहीं पहुंच पाए हैं, उन्हें 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर खोजेंगी और दवा पिलाएंगी।

राष्ट्रीय स्तर का लक्ष्य: इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत पूरे देश में लगभग 17 करोड़ बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष फोकस

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में व्यापक इंतजाम किए हैं। अभियान के दौरान दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों, ईंट-भट्टों, निर्माण स्थलों, शहरी स्लम बस्तियों और घुमंतू समुदायों के बच्चों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि बच्चे को हाल ही में कोई दूसरा टीका लगा हो या उसे हल्की सर्दी-खांसी या सामान्य बुखार हो, तब भी पोलियो की यह जीवनरक्षक खुराक पूरी तरह सुरक्षित है और इसे अनिवार्य रूप से पिलाया जाना चाहिए।

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