छत्तीसगढ़ PWD में करोड़ों का बड़ा घोटाला: ब्लैकलिस्टेड फर्म को नियमों के खिलाफ बांटे 13 करोड़ के ठेके, डिप्टी सीएम अरुण साव बोले- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
बिलासपुर स्मार्ट सिटी से प्रतिबंधित कंपनी ने झूठा शपथ पत्र देकर हथियाए टेंडर; लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD) की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा से भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों और कायदों को पूरी तरह ताक पर रखकर एक ऐसी कंपनी को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके बांट दिए, जिसे पहले ही ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) किया जा चुका था। बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा पांच साल की लंबी अवधि के लिए प्रतिबंधित की गई कंपनी मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर को विभाग ने करीब 13 करोड़ रुपये के टेंडर जारी कर दिए हैं। इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद से प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
जांच में सामने आए पुख्ता दस्तावेजों के मुताबिक, दागी कंपनी ने पीडब्ल्यूडी के टेंडर हासिल करने के लिए विभाग के समक्ष एक पूरी तरह से झूठा और फर्जी शपथ पत्र (एफिडेविट) पेश किया था। कंपनी के संचालक ने स्टांप पेपर पर लिखित रूप से यह झूठा दावा किया था कि उनकी फर्म देश या राज्य के किसी भी सरकारी विभाग या उपक्रम में ब्लैकलिस्ट या प्रतिबंधित नहीं है। बेहद चौंकाने वाली बात यह रही कि विभागीय अधिकारियों और टेंडर स्क्रूटनी कमेटी ने बिना किसी बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के, आंखें मूंदकर इस फर्जी दस्तावेज को स्वीकार कर लिया और कंपनी को पात्र घोषित कर दिया।
जबकि इस मामले की कड़वी सच्चाई यह है कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने साल 2023 में ही इस कंपनी की गंभीर अनियमितताओं के चलते उसकी निविदा सुरक्षा राशि (EMD) को पूरी तरह से जब्त कर लिया था और कंपनी को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया था। नियमतः कोई भी ब्लैकलिस्टेड फर्म सरकारी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के योग्य नहीं होती है, लेकिन इसके बावजूद PWD के अफसरों की मेहरबानी से कंपनी 13 करोड़ रुपये का बड़ा काम हथियाने में कामयाब रही। इस खुलासे के बाद विभाग के आला अधिकारियों की मिलीभगत और सांठगांठ के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
मामले के तूल पकड़ते ही छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री अरुण साव ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने साफ लहजे में कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इस पूरे टेंडर घोटाले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही फर्जी शपथ पत्र देने वाली ठेका कंपनी को तत्काल बर्खास्त कर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और जिन भी विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंदकर नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



