सड़क हादसों पर लगाम कसने के लिए साय सरकार का ‘एक्शन प्लान’: 4 महीनों में वसूला ₹62 करोड़ का जुर्माना, 7 हजार से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड
मंत्रालय में छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की हाई-प्रोफाइल बैठक; तकनीक, ई-ट्रैक और स्पीड कैमरों के जरिए सुधरेगी यातायात व्यवस्था

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने और सड़क हादसों के ग्राफ को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए अब पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ मोड में आ चुकी है। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने संयुक्त रूप से शिरकत की। बैठक में विधायक अनुज शर्मा सहित परिवहन और पुलिस विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे, जहां राज्य में सुरक्षित यातायात व्यवस्था और कड़े नियमों को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े और भावी रणनीतियां सामने आईं।
बैठक में यह आधिकारिक जानकारी दी गई कि यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रशासन बेहद सख्त है। जनवरी से अप्रैल 2026 तक के महज चार महीनों के भीतर नियमों का उल्लंघन करने वाले 2.86 लाख वाहनों पर कार्रवाई कर 62.21 करोड़ रुपये का शमन शुल्क (जुर्माना) वसूला गया है। इतना ही नहीं, लापरवाही से गाड़ी चलाने और गंभीर रूप से नियमों को तोड़ने वाले 7,434 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित अथवा पूरी तरह निरस्त (कैंसिल) कर दिए गए हैं, जो विभाग की अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाइयों में से एक है।
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप अब परिवहन विभाग को पूरी तरह हाई-टेक और वैज्ञानिक प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर समेत प्रमुख जिलों में आधुनिक वाहन फिटनेस केंद्र काम कर रहे हैं, जहां जनवरी से मई 2026 तक 31 हजार 604 वाहनों की फिटनेस जांच की गई। इसके अलावा, बिना मानवीय हस्तक्षेप के निष्पक्ष ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के लिए राज्य में आधुनिक ‘ई-ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक’ विकसित किए जा रहे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में 8 नए जिलों में इन ट्रैक्स का निर्माण तेजी से जारी है।
हादसों को रोकने के लिए तैनात हैं डिजिटल ‘तीसरी आंख’
सड़कों पर ओवरस्पीडिंग और हिट एंड रन के मामलों को रोकने के लिए प्रदेशभर के मुख्य मार्गों पर 174 एएनपीआर (ANPR) कैमरे और 7 लिडार (LiDAR) आधारित स्पीड कैमरे एक्टिव किए गए हैं। इन कैमरों की मदद से सिर्फ 5 महीनों में 61 हजार से अधिक ऑटोमैटिक चालान जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, भारी वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए अब तक 2 लाख 68 हजार 316 गाड़ियों में स्पीड गवर्नर लगाए जा चुके हैं।
मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए हैं कि केवल चालान काटना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर इसे एक जन-भागीदारी का आंदोलन बनाया जाए। उन्होंने ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने और ड्राइवरों की ट्रेनिंग को और अधिक कड़ा व आधुनिक बनाने पर विशेष बल दिया है।



