Korba News: बाल विवाह रोकने के बाद भी 15 वर्षीय किशोरी बनी मां, संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
कोरबा में बारात आने से पहले 15 वर्षीय किशोरी का बाल विवाह रुकवाया गया, लेकिन बाद में प्रसव पीड़ा के बाद उसने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। घटना से संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठे।

कोरबा। जिले में बाल विवाह रोकने की कार्रवाई के बावजूद एक गंभीर मामला सामने आया है। बारात आने से ठीक पहले महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने हस्तक्षेप कर 15 वर्षीय किशोरी का विवाह रुकवा दिया था। हालांकि, इसके बाद किशोरी की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल पहुंची किशोरी
रविवार को 15 वर्षीय किशोरी को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोरबा लाया गया। अस्पताल में कुछ ही समय बाद उसने एक शिशु को जन्म दिया। घटना सामने आने के बाद बाल संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
शादी रोकने के बाद निगरानी पर सवाल
बाल विवाह की सूचना मिलने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवाह तो रुकवा दिया, लेकिन इसके बाद किशोरी की स्थिति पर किस तरह निगरानी रखी गई और उसे किस प्रकार का संरक्षण मिला, यह सवाल अब सामने आ रहा है।
बाल विवाह की रोकथाम केवल विवाह रुकवाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में नाबालिग की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक संरक्षण की लगातार निगरानी जरूरी होती है।
संरक्षण व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर चर्चा
इस घटना ने बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के साथ-साथ प्रभावित बच्चों की आगे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। मामले में संबंधित विभागों की भूमिका और किशोरी को उपलब्ध कराए गए संरक्षण की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
नाबालिग की पहचान से जुड़ी किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है।



