CG Achievement: छत्तीसगढ़ की 7वीं की छात्रा ने धान की भूसी से बनाया हाईटेक वाटर फिल्टर, जापान में जीता सिल्वर मेडल
International Innovation: रायपुर की विग्या जैन और उनकी सहेलियों का कमाल, राइस हस्क ऐश से तैयार किया सबसे सस्ता और अनोखा वॉटर प्यूरीफायर

Class 7 Student Innovation News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक होनहार स्कूली छात्रा ने अपनी अद्भुत प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। महज सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा विग्या जैन ने अपनी सहेलियों आश्वी अग्रवाल और समैरा साहू के साथ मिलकर एक ऐसा अनोखा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। इन नन्हें वैज्ञानिकों ने कृषि प्रधान राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्य उत्पाद ‘धान की भूसी की राख’ (राइस हस्क ऐश) का इस्तेमाल करके एक बेहद कम लागत वाला और पर्यावरण के अनुकूल हाईटेक वाटर फिल्टर (Water Filter) तैयार किया है।
इन स्कूली छात्राओं द्वारा किए गए इस अनूठे वैज्ञानिक नवाचार (Innovation) ने न केवल देश के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। जापान में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान और नवाचार प्रतियोगिता में इस अनूठे वॉटर फिल्टर प्रोजेक्ट को प्रदर्शित किया गया था। वहां मौजूद वैश्विक जूरी और वैज्ञानिकों ने इस वेस्ट-टू-वेल्थ (कचरे से कंचन) मॉडल की उपयोगिता को खूब सराहा, जिसके चलते इस भारतीय प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘सिल्वर मेडल’ (Silver Medal) से नवाजा गया है।
छात्राओं द्वारा तैयार किए गए इस वाटर फिल्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। धान की भूसी की राख में प्राकृतिक रूप से एक्टिवेटेड कार्बन और सिलिका के गुण पाए जाते हैं, जो पानी में मौजूद हानिकारक अशुद्धियों, भारी तत्वों और गंध को सोखने में बेहद असरदार होते हैं। विग्या जैन और उनकी टीम की इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता पर उनके स्कूल प्रबंधन, परिजनों और पूरे छत्तीसगढ़ में गौरव का माहौल है। लोगों का कहना है कि छोटी सी उम्र में इन बच्चियों की यह बड़ी सोच देश में ‘स्टार्टअप इंडिया’ और बाल वैज्ञानिकों के उज्ज्वल भविष्य का एक बेहतरीन उदाहरण है।




