छत्तीसगढ़

School Education Department: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: अब SMDC खत्म, पहली से 12वीं तक केवल ‘SMC’ संभालेगी वित्तीय कमान

स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया नया आदेश; हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों की प्रबंधकीय व्यवस्था में हुआ बदलाव, ₹1 लाख तक के निर्माण कार्यों की होगी सीधी पावर।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत और सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बेहद बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। नए जारी आधिकारिक आदेश के तहत प्रदेश के सभी शासकीय हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में अब तक काम कर रही ‘विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति’ (SMDC) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इस व्यवस्था के बंद होने के बाद अब राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक के लिए केवल एक ही एकीकृत समिति यानी ‘विद्यालय प्रबंधन समिति’ (SMC) का गठन किया जाएगा, जो पूरे स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी।

इस नए प्रशासनिक बदलाव के बाद स्कूलों के संचालन, रख-रखाव और विकास कार्यों से जुड़े फैसलों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब नवगठित विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के पास न केवल स्कूल के दैनिक शैक्षणिक व प्रशासनिक संचालन की कमान होगी, बल्कि समिति को ₹1 लाख तक के लघु निर्माण और मरम्मत कार्यों की महत्वपूर्ण वित्तीय कमान (Financial Power) भी सौंप दी गई है। इस फैसले से जमीनी स्तर पर स्कूलों की छोटी-मोटी समस्याओं और बुनियादी अधोसंरचना के विकास के लिए अब उच्च अधिकारियों या लंबे टेंडर्स की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पूर्व में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्तर पर SMC और हाई व हायर सेकेंडरी स्तर पर SMDC काम करती थी, जिससे एक ही परिसर या संकुल के भीतर दो अलग-अलग समितियों के कारण समन्वय और वित्तीय निर्णयों में काफी जटिलता आती थी। अब पहली से 12वीं तक एक ही समिति होने से स्कूल प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और सुशासन के सिद्धांतों के अनुरूप काम तेजी से हो सकेगा। ₹1 लाख तक के कार्यों की स्वायत्तता मिलने से स्कूल परिसरों में पेयजल, शौचालय मरम्मत, बाउंड्री वॉल और ब्लैकबोर्ड जैसी जरूरी सुविधाओं का काम स्थानीय स्तर पर ही तुरंत कराया जा सकेगा।

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राज्य सरकार के इस विकेंद्रीकरण (Decentralization) वाले कदम की सराहना स्कूल प्राचार्यों और शिक्षक संगठनों द्वारा भी की जा रही है। उनका मानना है कि इस नीतिगत निर्णय से न केवल कागजी औपचारिकताएं कम होंगी, बल्कि निर्माण और विकास कार्यों की गति भी काफी तेज होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में पुरानी समितियों को भंग कर नई गाइडलाइन के अनुसार तय समय-सीमा के भीतर एकीकृत ‘SMC’ के गठन की प्रक्रिया को पूर्ण सुनिश्चित कराएं।

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