साइबर ठगी: पार्ट टाइम जॉब के झांसे में आईं असिस्टेंट प्रोफेसर, ‘अकाउंट-डॉक्यूमेंट ब्लॉक’ करने का डर दिखाकर ₹82 हजार की ठगी
ऑनलाइन डेटा एंट्री नौकरी के नाम पर साइबर अपराधियों ने बिछाया जाल; एग्रीमेंट कैंसिलेशन और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर ऐंठे पैसे

NV News रायपुर, 3 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर में साइबर ठगों के हौसले बुलंद हैं। अब पढ़े-लिखे और प्रबुद्ध वर्ग के लोग भी इन शातिर अपराधियों के मनोवैज्ञानिक जाल में फंस रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला रायपुर से सामने आया है, जहां पार्ट टाइम नौकरी की तलाश कर रही एक कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर साइबर ठगी (Cyber Fraud) का शिकार हो गईं। शातिर ठगों ने ऑनलाइन डेटा एंट्री जॉब दिलाने का झांसा दिया और बाद में कानूनी पचड़े, दस्तावेज और बैंक कार्ड ब्लॉक करने का खौफ दिखाकर महिला प्रोफेसर से कुल 82,250 रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।
पीड़िता की शिकायत पर रायपुर की साइबर सेल और संबंधित थाना पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
ऐसे शुरू हुआ ठगी का पूरा खेल
जानकारी के मुताबिक, असिस्टेंट प्रोफेसर अपने खाली समय का उपयोग करने और अतिरिक्त आमदनी के लिए ऑनलाइन पार्ट टाइम जॉब की तलाश कर रही थीं। इसी दौरान वे इंटरनेट पर सक्रिय एक फर्जी डेटा एंट्री जॉब (Data Entry Job) देने वाली कंपनी के संपर्क में आईं।
शुरुआती झांसा: ठगों ने उन्हें घर बैठे आसान डेटा एंट्री का काम देने का वादा किया और क्रेडेंशियल्स दर्ज कराने के नाम पर उनके जरूरी दस्तावेज (जैसे आधार, पैन कार्ड) ले लिए।
डर का मनोवैज्ञानिक खेल: काम शुरू होने के कुछ ही समय बाद ठगों ने अचानक पासा पलट दिया। उन्होंने प्रोफेसर पर काम में गलती निकालने या एग्रीमेंट (Agreement) के नियमों का उल्लंघन करने का झूठा आरोप लगाया।
ब्लॉक करने की धमकी: ठगों ने पीड़िता को डराया कि यदि उन्होंने ‘पेनल्टी’ या ‘कैंसिलेशन चार्ज’ नहीं दिया, तो उनके सारे सरकारी दस्तावेज, आईडी और बैंक क्रेडिट/डेबिट कार्ड हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिए जाएंगे और पुलिस उनके खिलाफ लीगल एक्शन लेगी।
अलग-अलग बहानों से ट्रांसफर कराए ₹82,250
असिस्टेंट प्रोफेसर ठगों द्वारा दिखाए गए कोर्ट-कचहरी और सरकारी दस्तावेज ब्लॉक होने के डर में आ गईं। इसी घबराहट का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने कभी ‘फाइल क्लोजर फीस’, कभी ‘जीएसटी’ तो कभी ‘अकाउंट वेरिफिकेशन’ के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल 82,250 रुपये अपने फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जब पैसे देने के बाद भी ठगों की डिमांड बंद नहीं हुई और वे और पैसों की मांग करने लगे, तब पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस की शरण ली।
साइबर एक्सपर्ट्स की चेतावनी – “धमकी से कभी न डरें”
रायपुर साइबर पुलिस ने आम नागरिकों, युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों से अपील की है कि कोई भी प्रामाणिक कंपनी काम देने के नाम पर पैसे नहीं मांगती। यदि कोई आपको एग्रीमेंट तोड़ने, कोर्ट केस करने या आपके आधार/पैन कार्ड और बैंक अकाउंट को ब्लॉक करने की धमकी देता है, तो बिल्कुल न डरें। कोई भी प्राइवेट व्यक्ति या कंपनी आपके सरकारी दस्तावेजों को ब्लॉक नहीं कर सकती। ऐसी कॉल आते ही तुरंत बातचीत बंद करें।
ठगी होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
पुलिस ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी ऑनलाइन ठगी या साइबर क्राइम का शिकार होता है, तो वह बिना वक्त गंवाए (गोल्डन ऑवर के भीतर) राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, जिससे ठगे गए पैसों को होल्ड या वापस कराया जा सके। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।



