Bastar Rehabilitation Camp: 3,800 से अधिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास का महाअभियान, कृत्रिम अंग और उपकरण मिलेंगे मुफ्त

Bastar Rehabilitation Camp, 5 अक्टूबर 2026। लंबे समय तक नक्सली हिंसा और बारूदी सुरंगों की घटनाओं का सामना कर चुके बस्तर में दिव्यांगजनों के पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया है। जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किया जा रहा है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित इस शिविर में बस्तर संभाग के बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिलों से 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन हुआ है। नक्सली विस्फोट, सड़क दुर्घटना और अन्य कारणों से अंग गंवा चुके लोगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है, लेकिन अब यह क्षेत्र विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह शिविर केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने हिंसा में अंग गंवा चुके लोगों को भरोसा दिलाया कि वे खुद को अकेला न समझें और सरकार तथा समाज संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बस्तर को हिंसा से मुक्त करने के साथ-साथ शांत, सशक्त और विकसित बस्तर का निर्माण करना है।
आईईडी पीड़ितों को फिर अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद से मुकाबला केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं है। बारूदी सुरंगों और आईईडी विस्फोटों में अंग गंवाने वाले नागरिकों को दोबारा आत्मनिर्भर बनाना भी पुनर्वास की अहम कड़ी है।
उन्होंने आईईडी ब्लास्ट में घायल ग्रामीण संतोष पोयाम तथा ड्यूटी के दौरान घायल पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी की जीवटता का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये लोग कृत्रिम अंगों की मदद से अब बिना किसी सहारे चलने के लिए तैयार हैं।
मौके पर ही तैयार हो रहे कृत्रिम हाथ-पैर
शिविर का आयोजन जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, एनएसई फाउंडेशन और भारतीय जैन संघटना के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। यहां ऑन-साइट आधुनिक कार्यशाला में विशेषज्ञ दिव्यांगजनों का व्यक्तिगत नाप लेकर मौके पर ही आधुनिक कृत्रिम हाथ, पैर और कैलिपर्स तैयार कर रहे हैं।
शिविर के पहले दिन 70 से अधिक हितग्राहियों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स, बैसाखी और श्रवण यंत्र भी निःशुल्क दिए जा रहे हैं।
मौके पर मेडिकल सर्टिफिकेट और पेंशन से जोड़ने की सुविधा
उप मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम शिविर स्थल पर ही दिव्यांगजनों का परीक्षण कर मेडिकल सर्टिफिकेट उपलब्ध करा रही है। हितग्राहियों को मौके पर ही शत-प्रतिशत दिव्यांग पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी की जा रही है, ताकि उन्हें सरकारी सुविधाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
दो चरणों में होगा शिविर का आयोजन
भारतीय जैन संघटना के डॉ. अतुल जैन ने बताया कि यह शिविर पहले कवर्धा में प्रस्तावित था, लेकिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के सुझाव के बाद बस्तर के पीड़ितों को प्राथमिकता देते हुए इसे यहां आयोजित किया गया।
पहले चरण में 5 से 7 अक्टूबर तक बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है। इनमें अकेले बस्तर जिले के 1,570 हितग्राही शामिल हैं। दूसरे चरण में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के लिए 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में शिविर आयोजित किया जाएगा।
पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात
बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा महत्वपूर्ण है। चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने के संकल्प का उल्लेख करते हुए पीड़ितों के संपूर्ण पुनर्वास को शासन की प्राथमिकता बताया।
कार्यक्रम में जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव वर्चुअल माध्यम से जुड़े। जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।



