छत्तीसगढ़ में बढ़ी कोदो-कुटकी की मांग: सुपर फूड से सँवर रही किसानों की किस्मत, सरकार दे रही है बंपर समर्थन मूल्य
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों से की मिलेट उत्पादन बढ़ाने की अपील— कम लागत में बंपर मुनाफे के साथ पोषण का भी है बड़ा आधार

Bol Bharat 24 News रायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कृषि धरोहर माने जाने वाले लघु धान्य कोदो और कुटकी आज के दौर में किसानों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच ‘सुपर फूड’ के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। बदलती जलवायु और पोषण संबंधी चुनौतियों के बीच यह मिलेट फसलें राज्य के किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक बेहतरीन जरिया बनकर उभरी हैं। सहायक जनसंपर्क अधिकारी एल.डी. मानिकपुरी के एक विशेष लेख के अनुसार, कोदो-कुटकी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें कम पानी, कम लागत और कम उपजाऊ या पथरीली जमीन पर भी बेहद आसानी से उगाया जा सकता है।
प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण आज राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कोदो-कुटकी की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह अनाज मधुमेह, मोटापा और एनीमिया जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में बेहद मददगार साबित हो रहा है। मिलेट्स के इसी महत्व को देखते हुए राज्य की विष्णु देव साय सरकार इन्हें लगातार बढ़ावा दे रही है। सरकार ने वर्ष 2026 के लिए कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 3,200 रुपये प्रति क्विंटल और कुटकी का मूल्य 3,350 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जिससे किसानों में इस पारंपरिक खेती को लेकर भारी उत्साह है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश के बड़े रकबे में कोदो और कुटकी की बुवाई की गई थी, जिसके चलते रिकॉर्ड टन में उत्पादन दर्ज किया गया है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले पखवाड़े तक उन्नत तकनीकों, बीजोपचार और कतार पद्धति से बुवाई करके किसान अपनी उत्पादकता को और अधिक बढ़ा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने भी प्रदेश के किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का रकबा बढ़ाने की अपील की है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।



