266 रुपये की यूरिया 500 और 1500 की डीएपी 2000 में बेची; पाटन में कृषि सेवा केंद्र संचालक पर एफआईआर दर्ज
दुर्ग जिले में कृषि विभाग की जांच टीम का बड़ा एक्शन; खाद की कालाबाजारी और स्टॉक में भारी अनियमितता मिलने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई

25 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक में कृषि विभाग की जिला स्तरीय जांच टीम ने उर्वरक (खाद) की कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों पर शिकंजा कसा है। पाटन स्थित ‘मेसर्स कृषि सेवा केंद्र’ में औचक निरीक्षण के दौरान निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचने और स्टॉक में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।
तय दाम से दोगुने दाम पर बेची जा रही थी खाद
जांच टीम के निरीक्षण में सामने आया कि दुकान संचालक किसानों को तय दरों से काफी अधिक कीमत पर उर्वरक बेच रहा था:
यूरिया: शासकीय निर्धारित मूल्य ₹266 की जगह ₹500 प्रति बोरी।
डीएपी (DAP): शासकीय निर्धारित मूल्य ₹1500 की जगह ₹2000 प्रति बोरी।
कानूनी कार्रवाई:
वरिष्ठ उर्वरक निरीक्षक एवं प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पाटन, पुष्पा रामटेके की आधिकारिक शिकायत के आधार पर दुकान संचालक रूपेश कश्यप के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 एवं 7 के तहत मामला (FIR) दर्ज कर लिया गया है।
किसानों के शोषण पर प्रशासन सख्त
कृषि विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन में किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ओवररेटिंग और कालाबाजारी करने वाले खाद विक्रेताओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।



