Amrit Kaur Untold Story: राजघराने की वो राजकुमारी जिसने भारत को दिया पहला AIIMS; 16 वर्षों तक रहीं महात्मा गांधी की सेक्रेटरी
देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री अमृत कौर की अनसुनी कहानी; कपूरथला के शाही परिवार का वैभव छोड़ स्वतंत्रता संग्राम में कूदीं, एम्स की स्थापना के लिए खुद जुटाया था फंड

20 जुलाई 2026। भारतीय इतिहास के पन्नों में कई ऐसे व्यक्तित्व दर्ज हैं, जिन्होंने देश के निर्माण के लिए अपने सर्वस्व का त्याग कर दिया। इन्हीं में से एक बेहद चमकता हुआ नाम है अमृत कौर का। दैनिक जागरण की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमृत कौर का जन्म पंजाब के कपूरथला राजघराने में हुआ था। राजा हरनाम सिंह की सुपुत्री होने के नाते उनका जीवन बेहद सुख-सुविधाओं और राजसी वैभव के बीच बीता। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इंग्लैंड के प्रख्यात शेborne स्कूल और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पूरी की। वे एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी भी थीं। लेकिन विदेश से पढ़ाई पूरी कर जब वे भारत लौटीं, तो देश की गुलामी और तत्कालीन सामाजिक कुप्रथाओं ने उनके मन को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने राजघराने की विलासितापूर्ण जिंदगी को हमेशा के लिए त्याग कर खुद को देश की आजादी के आंदोलन में झोंक दिया।
गांधी की परछाईं बनकर 16 साल तक किया काम
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अमृत कौर का झुकाव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों की ओर हुआ, जिसके बाद का सफर देश के इतिहास का अहम हिस्सा बन गया:
16 वर्षों तक रहीं गांधी की सेक्रेटरी: अमृत कौर महात्मा गांधी के व्यक्तित्व से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने साबरमती आश्रम को ही अपना घर बना लिया। वे लगातार 16 वर्षों तक महात्मा गांधी की सचिव (सेक्रेटरी) के रूप में कार्य करती रहीं। इस दौरान उन्होंने गांधी के पत्रों के जवाब लिखने से लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक आंदोलनों के ड्राफ्ट तैयार करने तक की बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।
आजादी के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी: उन्होंने 1930 में नमक सत्याग्रह और डांडी मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इसके अलावा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी उन्होंने जेल की सजा काटी। वे देश में महिला अधिकारों और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाली अग्रणी महिला नेत्री थीं।
देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री और एम्स (AIIMS) की नींव
आजादी के बाद जब देश में अंतरिम सरकार का गठन हुआ, तो अमृत कौर को एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी सौंपी गई:
एम्स की स्थापना का ऐतिहासिक सफर:
अमृत कौर आजाद भारत की पहली कैबिनेट महिला मंत्री और पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनका सबसे बड़ा और अविस्मरणीय योगदान नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना करना था। उस दौर में देश के पास स्वास्थ्य बजट बहुत कम था। एम्स जैसी विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्था बनाने के लिए अमृत कौर ने खुद व्यक्तिगत प्रयास किए। उन्होंने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों से फंड जुटाया। इतना ही नहीं, उन्होंने शिमला में स्थित अपनी पैतृक संपत्ति ‘मैनरविले’ (जहाँ कभी महात्मा गांधी भी ठहरे थे) को एम्स के डॉक्टरों और नर्सों के हॉलिडे होम के रूप में दान कर दिया।
अमृत कौर 10 वर्षों (1947 से 1957) तक देश की स्वास्थ्य मंत्री रहीं। इस दौरान उन्होंने देश से मलेरिया और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियों के उन्मूलन के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। वे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की अध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली महिला और पहली एशियाई भी थीं। राजघराने से निकलकर देश के आम नागरिकों की सेहत सुधारने वाली इस महान स्वतंत्रता सेनानी की कहानी आज भी करोड़ों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।



