विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री केदार कश्यप का संदेश: ‘हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी पहचान, संरक्षण हमारी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण बन रहा जनआंदोलन; 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से रोपे गए करोड़ों पौधे

CG News- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने 44 प्रतिशत वन भूभाग, समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार प्रकृति के संवर्धन को ही विकास की मूल धुरी मानकर कार्य कर रही है। वन मंत्री ने जल संरक्षण संरचनाओं, वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और लघु वनोपज आधारित आजीविका के क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में हुए कार्यों को राज्य के विकास का आधार बताया।
रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर वन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि ‘हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी असल पहचान है और इसका संरक्षण व संवर्धन करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार वन और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ हरित आवरण को बढ़ाने के लिए लगातार अभिनव प्रयास कर रही है। पिछले दो वर्षों में शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान ने जनभागीदारी के जरिए पर्यावरण संरक्षण को एक बड़े जनआंदोलन का रूप दे दिया है, जिसके तहत प्रदेशभर में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है।
वन मंत्री ने छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और प्राकृतिक संपन्नता का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत भूभाग वनों से आच्छादित है। इन वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के माध्यम से हरित क्षेत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मिली सफलताओं को साझा करते हुए बताया कि प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्वों में वन्यप्राणियों की संख्या बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी ‘दूधराज’ द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य सामने आया है, जो राज्य के सुरक्षित प्राकृतिक आवासों और समृद्ध जैव विविधता का एक बड़ा प्रमाण है।

पर्यावरण संतुलन और जल संरक्षण की दिशा में वन विभाग की उपलब्धियों को बताते हुए केदार कश्यप ने कहा कि पिछले दो वर्षों में वन क्षेत्रों में हजारों तालाबों और जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण व पुनर्जीवन किया गया है। बस्तर सहित विभिन्न वन क्षेत्रों में हुए इन कार्यों से जहां वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है, वहीं मैदानी इलाकों के भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके साथ ही, राज्य सरकार वनाश्रित समुदायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने अंत में सभी नागरिकों से अपील की कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा जरूर लगाए और प्रकृति को बचाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए।



