गोलियों की बौछार भी नहीं डिगा सकी हौसला: मणिपुर में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले छत्तीसगढ़ के जांबाज भोजराम साहू को मिला ‘शौर्य चक्र’
बालोद जिले के ढोरीठेमा गांव में जश्न का माहौल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में असम राइफल्स के वीर जवान को सर्वोच्च सम्मान से नवाजा

छत्तीसगढ़ की माटी के एक और लाल ने देश स्तर पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक अंतर्गत सुदूर ग्राम ढोरीठेमा के रहने वाले असम राइफल्स के जांबाज जवान भोजराम साहू को उनकी अनुकरणीय वीरता, अदम्य साहस और सर्वोच्च कर्तव्यपरायणता के लिए देश के प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान ‘शौर्य चक्र’ से विभूषित किया गया है। देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय रक्षा अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं इस वीर सपूत को यह मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
जवान भोजराम साहू की यह शौर्य गाथा मणिपुर में देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा के दौरान लिखी गई थी। एक बेहद चुनौतीपूर्ण उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन के दौरान दुश्मनों और उग्रवादियों ने सेना के दल पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस भीषण मुठभेड़ में भोजराम साहू को दुश्मनों की गोली भी लगी, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद इस वीर योद्धा ने मैदान नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल उग्रवादियों की रीढ़ तोड़ी, बल्कि उनके कई खतरनाक मंसूबों को मिट्टी में मिलाते हुए उन्हें धूल चटा दी।
जैसे ही दिल्ली के राष्ट्रपति भवन से जवान भोजराम साहू को शौर्य चक्र दिए जाने की खबर उनके गृहग्राम ढोरीठेमा और पूरे बालोद जिले में पहुंची, लोग खुशी से झूम उठे। ग्रामीणों ने आतिशबाजी कर और मिठाई बांटकर इस गौरवशाली पल का जश्न मनाया। भोजराम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने बधाई दी है। देश के लिए अपना खून बहाकर सर्वोच्च सम्मान पाने वाले भोजराम साहू आज छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए देशभक्ति और प्रेरणा के सबसे बड़े प्रतीक बन गए हैं।



