उत्तरप्रदेश

Ram Temple Donation: चढ़ावा चोरों से पाई-पाई वसूली जाएगी; ट्रस्ट ने बताया 6 साल में कितना मिला चंदा, कितना हुआ खर्च और बाकी कहां है?

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जारी किया आय-व्यय का पूरा आधिकारिक ब्यौरा; जानिए तिजोरी का पूरा सच

अयोध्या, 8 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर में ‘चढ़ावा चोरी’ का मामला इन दिनों देश भर में सुर्खियों में है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इसी बीच, पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वर्ष 2020 में अपनी स्थापना से लेकर अब तक मिले कुल चंदे, मंदिर निर्माण में हुए खर्च और वर्तमान में बचे हुए फंड का पूरा आधिकारिक वित्तीय लेखा-जोखा सार्वजनिक कर दिया है।

इसके साथ ही, यूपी सरकार और अयोध्या पुलिस ने साफ कर दिया है कि चढ़ावा चोरी करने वाले आरोपियों से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-107 के तहत अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को कुर्क कर पाई-पाई की रिकवरी की जाएगी।

6 वर्षों का पूरा वित्तीय ब्यौरा: कहाँ से कितना आया और कितना खर्च हुआ? (Ram Mandir Trust Balance Sheet)

ट्रस्ट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निधि समर्पण अभियान, कॉर्पस फंड और दैनिक चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब इस प्रकार है:

1. निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान (Donations & Corpus Fund)

कुल प्राप्त राशि: स्थापना से लेकर अब तक ट्रस्ट को देश-विदेश के रामभक्तों से कुल ₹3,264 करोड़ का कॉर्पस दान और समर्पण राशि प्राप्त हुई।

निर्माण कार्यों में खर्च: इस कुल राशि में से ₹2,370 करोड़ की भारी-भावुक रकम भव्य मंदिर निर्माण और अन्य बड़े बुनियादी ढांचों (पूंजीगत व्यय) के विकास में खर्च की जा चुकी है।

2. रामलला का दैनिक और विशेष चढ़ावा (Temple Offerings/Chadhava)

कुल चढ़ावा (31 मार्च 2026 तक): मंदिर के दान पात्रों और दैनिक दर्शन के दौरान कुल ₹582 करोड़ का नकद चढ़ावा प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही 2,926 बहुमूल्य वस्तुएं/भेंट भी मिली हैं।

संचालन और व्यवस्था व्यय: इस चढ़ावे की राशि में से ₹391 करोड़ मंदिर के दैनिक संचालन, सुरक्षा, रखरखाव, भंडारा और प्रशासनिक खर्चों में उपयोग किए गए हैं।

बाकी बची हुई रकम कहाँ है? ट्रस्ट के अनुसार, कुल प्राप्त दान और चढ़ावे में से तय खर्चों को घटाने के बाद जो भी शेष अधिशेष (Surplus) राशि बची है, वह पूरी तरह सुरक्षित है। इसे विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों (मुख्य रूप से एसबीआई और अन्य 7 बैंकों) में सावधि जमा (FD) और ट्रस्ट के आधिकारिक चालू/बचत खातों में ब्याज अर्जित करने के लिए सुरक्षित रखा गया है।

944 किलो चांदी गलाई गई, 20 किलो सोने का भी ब्यौरा

वित्तीय आंकड़ों के अलावा, भक्तों द्वारा अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन करने के लिए भारत सरकार के उपक्रम प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) की मदद ली गई है। ट्रस्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक लगभग 944 किलोग्राम चांदी को गलाकर सुरक्षित रखा गया है, जबकि कुल मिलाकर करीब 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना अलग-अलग रूपों में दान में प्राप्त हुआ है।

एसआईटी अब पिछले 5 वर्षों के बैंकिंग लेन-देन और मिंट को भेजी गई धातुओं के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि किसी भी तरह की विसंगति को पकड़ा जा सके और व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य बनाया जा सके।

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