शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से संतों ने की भेंट, सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का किया स्वागत
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में फिर गूंजेंगे सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और शांतिपाठ; भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही साय सरकार।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ की शासकीय शिक्षण व्यवस्था को वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बेहद बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास कार्यालय में प्रदेश के विभिन्न संप्रदायों के पूज्य संत-महात्माओं से सौजन्य भेंट की। इस बेहद गरिमामय अवसर पर संत समाज ने छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा और पारंपरिक श्लोकों व मंत्रों को दोबारा पाठ्यक्रम और दैनिक प्रार्थनाओं में शामिल किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय का दिल खोलकर स्वागत किया और मुख्यमंत्री के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री निवास पहुंचे दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर श्री स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के श्री महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से श्री उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के श्री देवकर साहब जी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए विशेष रूप से साधुवाद और आशीर्वाद दिया। संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण में विद्यार्थियों को “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर” जैसे मंत्रों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से अनिवार्य रूप से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में बाल्यकाल से ही संस्कार, सामाजिक अनुशासन और उच्च नैतिक मूल्यों का स्वतः विकास होता था।
संतों ने आगे कहा कि समय के साथ ये गौरवशाली परंपराएं स्कूलों से धीरे-धीरे विलुप्त होती चली गईं, लेकिन अब साय सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की यह अभिनव पहल अत्यंत स्वागत योग्य है। विद्यालयों में दैनिक रूप से शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक व सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के मानसिक और सर्वांगीण विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी अपनी समृद्ध ज्ञान परंपरा, ऐतिहासिक जड़ों और नैतिक मूल्यों से मजबूती से जुड़ सकेगी, जो कि आज के आधुनिक और डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक भटकाव को रोकने के लिए बेहद आवश्यक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संतों को आश्वस्त करते हुए कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान अर्जित करने या रोजगार पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का असली आधार है। हमारी सरकार बच्चों को वैश्विक स्तर की आधुनिक शिक्षा देने के साथ-साथ अपनी सनातन संस्कृति, महान परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्कूलों में इन प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के गूंजने से विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और गहरी सांस्कृतिक चेतना का संचार होगा, जो उन्हें देश का एक जागरूक, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।



