Free Campaign News: छत्तीसगढ़ में नशामुक्ति को लेकर बड़ी पहल, 5 नए जिलों में खुलेंगे नशामुक्ति केंद्र
राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक: भारत माता वाहिनी योजना का होगा विस्तार, नशामुक्ति केंद्रों में लगेंगे सीसीटीवी और बायोमैट्रिक सिस्टम, 15 से बढ़कर 50 बिस्तर की होगी क्षमता।

Bol Bharat 24 News रायपुर: छत्तीसगढ़ को नशामुक्त बनाने और शराब व्यसन मुक्ति अभियान (भारत माता वाहिनी योजना) को ग्रामीण स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा के लिए गठित राज्य स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने की। बैठक में विभाग के संचालक श्री रणवीर शर्मा सहित विभिन्न संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
इस समीक्षा बैठक में राज्य के भौगोलिक और सामाजिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया। प्रदेश के ऐसे 5 जिलों में नए नशामुक्ति केंद्र खोलने की मंजूरी दी गई है, जहां अब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इन नए केंद्रों की स्थापना मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, बेमेतरा और कोरबा जिलों में की जाएगी। इस पहल से सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के नशापीड़ित व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर ही सही इलाज, आवश्यक परामर्श और पुनर्वास की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
बैठक के दौरान नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गई। इसके तहत राज्य के प्रत्येक विकासखण्ड की एक हजार से अधिक जनसंख्या वाली नवीन ग्राम पंचायतों में ‘भारत माता वाहिनी’ के गठन एवं विस्तार संबंधी प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही, वर्तमान में संचालित 15 बिस्तरों वाले एकीकृत पुनर्वास केंद्रों की क्षमता को बढ़ाकर 50 बिस्तर करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया, ताकि अधिक से अधिक पीड़ितों को एक समय में गुणवत्तापूर्ण उपचार दिया जा सके।
नशामुक्ति केंद्रों के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी बदलावों पर भी सहमति बनी है। अब सभी संचालित नशामुक्ति केंद्रों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए वहां अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे और स्टाफ व लाभार्थियों के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली स्थापित की जाएगी। समिति का मानना है कि इस डिजिटल तकनीक से केंद्रों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गड़बड़ी पर लगाम कसी जा सकेगी।
बैठक में पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान किए गए कार्यों और बजटीय व्यय की समीक्षा की गई, साथ ही चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना और आवश्यक मानव संसाधन (डॉक्टर, काउंसलर व स्टाफ) की उपलब्धता पर विस्तार से रणनीति बनाई गई। प्रमुख सचिव ने एनसीओआरडी (NCORD) एवं एनएमबीए (NMBA) के प्रभावी क्रियान्वयन में विभागीय समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि इसमें सामाजिक संगठनों तथा जनसमुदाय की सक्रिय सहभागिता सबसे अनिवार्य है।



