स्वास्थ्य सेवाओं पर मंत्री सख्त: भानपुरी सिविल अस्पताल पहुंचे केदार कश्यप, बोले— लापरवाही की तो तय होगी जवाबदेही
जीवनदीप समिति की बैठक में करंदोला और भानपुरी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा; वनांचल के मरीजों को समय पर दवा और इलाज देने के कड़े निर्देश

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने आज सिविल अस्पताल भानपुरी और करंदोला का औचक दौरा कर वहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान वे अस्पतालों में आयोजित जीवनदीप समिति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए और चिकित्सा सेवाओं, डॉक्टरों की उपस्थिति तथा मरीजों को मिल रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री कश्यप ने दोटूक शब्दों में कहा कि अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुविधा और उनका समय पर उपचार सरकार की सर्वोपरि प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में वनमंत्री केदार कश्यप ने अस्पतालों में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता, जरूरी दवाओं के पर्याप्त भंडारण, पैथोलॉजी जांच सुविधाओं, परिसर की स्वच्छता व्यवस्था सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देशित किया कि वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इलाज या दवाओं के लिए भटकना न पड़े, यह सुनिश्चित किया जाए। अस्पतालों में आने वाले हर जरूरतमंद को सहज, सरल और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए, साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ का मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार होना बेहद आवश्यक है।
मंत्री कश्यप ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। सुदूर अंचलों के अस्पतालों में आवश्यक संसाधन, आधुनिक उपकरण और डॉक्टरों की कमी को लगातार दूर किया जा रहा है ताकि स्थानीय लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े और उन्हें अपने ही क्षेत्र में बेहतर व निशुल्क उपचार मिल सके। इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित जीवनदीप समिति के सम्मानित सदस्य और अस्पताल प्रबंधन का प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।




