छत्तीसगढ़

हक के लिए अनोखा आंदोलन: राजा पड़ाव क्षेत्र के 500 ग्रामीणों ने खून से पत्र लिखकर PM मोदी से मांगी बिजली

48 गांवों में आज भी पसरा है अंधेरा; राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को भी भेजी गई मार्मिक अपील, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाएं ठप

Bol Bharat 24 News, गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजा पड़ाव क्षेत्र से व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक बेहद भावुक और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। इस आधुनिक और डिजिटल युग में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। आजादी के दशकों बाद भी क्षेत्र के 48 गांव आज भी पूरी तरह से विद्युत सुविधा से वंचित हैं। लंबे समय से शासन-प्रशासन के सामने गुहार लगाने और कई आंदोलनों के बावजूद जब सुनवाई नहीं हुई, तो इस गंभीर समस्या से जूझ रहे लगभग 500 ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने खून से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नाम पत्र लिखकर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मार्मिक अपील की है।

ग्रामीणों का दर्द है कि 21वीं सदी के इस दौर में भी उनकी जिंदगी पूरी तरह अंधेरे में गुजर रही है। बिजली न होने के कारण न केवल पूरा इलाका पिछड़ रहा है, बल्कि सबसे बुरा असर नई पीढ़ी पर पड़ रहा है। लालटेन और मोमबत्ती के भरोसे रात काटने को मजबूर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह चौपट हो रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं भी वेंटिलेटर पर हैं; अस्पतालों में जरूरी उपकरण बिजली के अभाव में शो-पीस बनकर रह गए हैं, जिससे मरीजों के इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण इस दोहरी मार से बेहद आहत हैं।

इस अनोखे और रोंगटे खड़े कर देने वाले आंदोलन ने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है। दरअसल, राजा पड़ाव का यह पूरा क्षेत्र वन विभाग और बाघ संरक्षण अभयारण्य (टाइगर रिजर्व) के नियमों के दायरे में आता है, जिसके चलते यहां बिजली के खंभे और तार बिछाने में तकनीकी व कानूनी अड़चनें आ रही हैं। यही वजह है कि ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा सीधे देश के प्रधानमंत्री और एनटीसीए के आला अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए यह आत्मघाती और संवेदनशील कदम उठाया है। ग्रामीणों ने दोटूक कहा है कि जब तक उनके घरों में रोशनी नहीं पहुंच जाती, उनका यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।

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