छत्तीसगढ़

विवादों से दूर, देश के लिए मिसाल बना बारनवापारा अभयारण्य का यह गांव; वन्यजीवों के लिए ग्रामीणों ने खुद चुनी ‘विस्थापन’ की राह

कसडोल विकासखंड के ग्राम बार का अनुकरणीय फैसला: वन्यजीवों के संरक्षण और बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए ग्राम सभा में सर्वसम्मति से लिया बड़ा निर्णय

कसडोल/बलौदाबाजार, 2 जुलाई 2026। पूरे देश में जहां जंगलों और अभयारण्यों से ग्रामीणों के विस्थापन (Displacement) को लेकर अक्सर बड़े विवाद, विरोध-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई की खबरें सामने आती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य (Barnawapara Wildlife Sanctuary) से एक बेहद सुखद और देश को नई राह दिखाने वाली खबर आई है। अभयारण्य के ठीक बीचों-बीच बसे ग्राम ‘बार’ के आदिवासियों और ग्रामीणों ने आपसी सूझबूझ का परिचय देते हुए एक ऐसा अनुकरणीय निर्णय लिया है, जो देश भर के लिए मिसाल बन गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए, इस गांव ने बिना किसी विवाद के स्वेच्छा से विस्थापन की राह चुनी है।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड के अंतर्गत आने वाले इस अभयारण्य क्षेत्र में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। इस ग्राम सभा में गांव के मुखिया, बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं सहित सभी ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बैठक के दौरान इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि अभयारण्य के कोर एरिया (Core Area) में बसे होने के कारण जहां एक ओर जंगली जानवरों का इंसानी आबादी से टकराव बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं जैसे पक्के रास्ते, अच्छे स्कूल और बड़े अस्पतालों की कमी के कारण उनके बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है।

सर्वसम्मति से लिया गया ऐतिहासिक फैसला

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गहन विचार-विमर्श के बाद, ग्राम सभा में मौजूद सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। ग्रामीणों ने कहा कि वे प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण में बाधक नहीं बनना चाहते। वे चाहते हैं कि बारनवापारा के घने जंगलों में बाघ, तेंदुए, गौर (भारतीय बायसन) और हिरण जैसे दुर्लभ वन्यजीव बिना किसी इंसानी दखल के स्वतंत्र और सुरक्षित घूम सकें। इसके साथ ही, मुख्यधारा से जुड़ने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को आधुनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर गांव खाली करने और दूसरी जगह बसने (Relocation) पर अपनी सहमति दे दी।

वन विभाग और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों के इस त्याग और दूरदर्शी सोच की मुक्त कंठ से सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की स्वैच्छिक विस्थापन नीति के तहत इस गांव के प्रत्येक परिवार को नियमानुसार आकर्षक मुआवजा पैकेज, कृषि योग्य भूमि और सर्वसुविधायुक्त पुनर्वास स्थल पर तमाम बुनियादी सुविधाएं (बिजली, पानी, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र) प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि विस्थापन की इस पूरी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरा किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

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