राम मंदिर विवाद के बाद अब मां दंतेश्वरी मंदिर के चढ़ावे पर उठे सवाल, रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की उठी मांग
बस्तर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ के खजाने और आभूषणों के ब्यौरे पर मुख्य पुजारी ने उठाए सवाल, 8 साल बाद भी अधूरी है जांच

जगदलपुर: अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उपजे विवाद के बाद अब छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और बेहद प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर के खजाने पर भी सवाल उठने लगे हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और नकद राशि से जुड़े रिकॉर्ड्स अब संदेह के घेरे में आ गए हैं। इस मामले में मंदिर के मुख्य पुजारी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बीते कई वर्षों से मंदिर के चढ़ावे और आभूषणों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संबंध में की गई एक शिकायत की जांच पिछले आठ सालों से लटकी हुई है, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी। अब इस खजाने के पारदर्शी सत्यापन की मांग तेजी से उठने लगी है।
दरअसल, बस्तर की रियासतकालीन परंपरा और संस्कृति से जुड़े मां दंतेश्वरी मंदिर समेत क्षेत्र के करीब 22 प्रमुख मंदिरों का पूरा संचालन और देखरेख एक सरकारी ‘टेंपल कमिटी’ (मंदिर समिति) के माध्यम से किया जाता है। इन आस्था केंद्रों में, खासकर दंतेवाड़ा और जगदलपुर के दंतेश्वरी माई के दरबार में, हर साल देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु करोड़ों रुपये की नकद राशि, कीमती सोने-चांदी के आभूषण, छत्र और अन्य मूल्यवान सामग्रियां श्रद्धापूर्वक अर्पित करते हैं।
इस भारी-भरकम चढ़ावे और ऐतिहासिक आभूषणों के रख-रखाव में पारदर्शिता की कमी को देखते हुए अब स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। आम जनता और श्रद्धालुओं की ओर से यह मांग पुरजोर तरीके से उठाई जा रही है कि मंदिर के पूरे खजाने का नए सिरे से पारदर्शी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए। साथ ही, वर्षों से जमा इस ब्यौरे को पूरी तरह सार्वजनिक किया जाए ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन के बीच पारदर्शिता बनी रहे।



