छत्तीसगढ़

Bike Stunt Controversy: गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस की गाड़ी में बैठ आरोपी ने बनाई रील, कैप्शन में लिखा- “आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही खेल”

Durg Crime News: दुर्ग पुलिस की कस्टडी में अपराधी की दादागिरी, सरकारी गाड़ी से इंस्टाग्राम पर वीडियो डाल उड़ाया कानून का मजाक

Bike Stunt Controversy (बाइक स्टंट विवाद): छत्तीसगढ़ के हाईटेक और वीआईपी जिलों में शुमार दुर्ग से कानून-व्यवस्था को तार-तार करने वाला एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। दुर्ग जिले के भिलाई शहर की व्यस्त सड़कों पर अपनी जान की परवाह किए बिना और राहगीरों के लिए मौत का सबब बनकर खतरनाक बाइक स्टंटबाजी करने वाले एक रीलबाज आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन सलाखों के पीछे जाने के मोड़ पर भी इस शातिर अपराधी के हौसले पस्त नहीं हुए। अमूमन देखा जाता है कि पुलिस के शिकंजे में आते ही बड़े से बड़े अपराधियों की हेकड़ी निकल जाती है, लेकिन भिलाई के इस स्टंटबाज ने पुलिस कस्टडी में रहते हुए जो दुस्साहस दिखाया है, उसने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोपी ने पुलिस की गाड़ी के भीतर ही न सिर्फ वीडियो बनाया, बल्कि उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया। यह वीडियो अब इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है और लोग पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

पूरे मामले की कड़ियों को अगर सिलसिलेवार ढंग से समझें, तो कुछ दिनों से भिलाई और दुर्ग की सड़कों पर रात के सन्नाटे में और दिन के उजाले में भी कुछ रीलबाज युवा तेज रफ्तार बाइक पर जानलेवा स्टंट कर रहे थे। इनका मकसद सिर्फ सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स बटोरना था। आम जनता की लगातार मिल रही शिकायतों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्टंट के वीडियो का संज्ञान लेते हुए दुर्ग पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत और मुखबिरों की सूचना के आधार पर इस मुख्य आरोपी को धर दबोचा, जो भिलाई की मुख्य सड़कों पर स्टंट का सरगना बना हुआ था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से लगा था कि अब सड़कों पर हुड़दंग थमेगा और युवाओं में कानून का खौफ पैदा होगा, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब आरोपी को पुलिस वाहन में बैठाकर थाने या कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की लापरवाही का फायदा उठाते हुए आरोपी ने अपना स्मार्टफोन निकाला और पुलिस की चलती गाड़ी के अंदर ही अपनी रील्स (Short Video) रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।

हद तो तब हो गई जब आरोपी ने इस रील को सिर्फ अपने फोन में सुरक्षित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने अधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी पर लाइव पोस्ट कर दिया। वीडियो के बैकग्राउंड में एक टपोरी स्टाइल और धमक भरा म्यूजिक बज रहा था, लेकिन सबसे ज्यादा हैरान और आक्रोशित करने वाला था उस वीडियो पर लिखा गया कैप्शन। आरोपी ने बेहद गर्व के साथ बड़े अक्षरों में लिखा था— “आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही खेल”। इस एक लाइन के कैप्शन ने साफ कर दिया कि अपराधियों के मन में आज की तारीख में पुलिस की कार्रवाई, अदालती प्रक्रिया और जेल की सलाखों का कोई डर नहीं रह गया है। उनके लिए अपराध करना, पकड़े जाना और फिर जमानत पर बाहर आकर दोबारा उसी अपराध को दोहराना महज एक ‘खेल’ बनकर रह गया है। यह वीडियो जैसे ही इंस्टाग्राम से डाउनलोड होकर व्हाट्सएप ग्रुप्स और ट्विटर (X) पर वायरल हुआ, वैसे ही दुर्ग-भिलाई के नागरिकों में भारी गुस्सा फूट पड़ा।

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इस घटना ने पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और उनकी चौकसी की पोल खोलकर रख दी है। सबसे बड़ा सवाल तो यह उठता है कि जब किसी आरोपी को हिरासत में या गिरफ्तार किया जाता है, तो नियम के मुताबिक सबसे पहले उसकी तलाशी ली जाती है और उसका मोबाइल फोन व अन्य सामग्रियां जब्त कर ली जाती हैं। ऐसे में इस स्टंटबाज आरोपी के पास पुलिस की गाड़ी के अंदर मोबाइल फोन कैसे मौजूद रहा? क्या गाड़ी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर उसे रील बनाने की अनुमति दी या फिर पुलिसकर्मी इतने लापरवाह थे कि उन्हें भनक तक नहीं लगी कि उनकी ही नाक के नीचे उनकी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल अपराध के महिमामंडन के लिए किया जा रहा है? सोशल मीडिया पर लोग दुर्ग पुलिस को टैग करके लगातार पूछ रहे हैं कि क्या अब अपराधियों को पुलिस वैन में रील बनाने और वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने का नया नियम आ गया है?

दुर्ग जिले में अपराधियों द्वारा पुलिस की नाक के नीचे कानून-व्यवस्था को इस तरह खुली चुनौती देने का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन सरकारी गाड़ी के भीतर से ऐसी हेकड़ी दिखाना सीधे तौर पर पुलिस की साख पर बट्टा लगाता है। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद से भिलाई पुलिस और जिले के आला अधिकारी पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर हड़कंप मचा हुआ है कि इस लापरवाही के लिए कौन से पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और वीडियो में दिख रहे पुलिस वाहन में तैनात कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, इस वायरल वीडियो ने समाज के बुद्धिजीवियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आज की युवा पीढ़ी रील और सोशल मीडिया के फेम के चक्कर में किस कदर अंधी हो चुकी है कि उन्हें जेल जाने में भी कोई शर्म या पछतावा महसूस नहीं हो रहा है।

अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस स्टंटबाज आरोपी पर केवल ट्रैफिक नियमों या सामान्य धाराओं के तहत कार्रवाई न की जाए, बल्कि पुलिस की छवि धूमिल करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने या उसका गलत इस्तेमाल करने और समाज में कानून के प्रति अविश्वास फैलाने के जुर्म में अतिरिक्त और गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं। लोगों का कहना है कि जब तक ऐसे रीलबाजों और अपराधियों को कोर्ट से कड़ा सबक नहीं मिलेगा और उनकी ‘बेल’ के बाद ‘खेल’ वाले अहंकार को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक सड़कों पर मासूमों की जान ऐसे ही खतरे में पड़ती रहेगी। बहरहाल, अब देखना यह होगा कि इस भारी फजीहत के बाद दुर्ग पुलिस अपनी साख बचाने के लिए इस ढीठ अपराधी पर क्या नया और कड़ा एक्शन लेती है, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी पुलिस कस्टडी को अपना रील स्टूडियो समझने की भूल न करे।

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