Co-Operative Scam: सरगुजा संभाग के सहकारी बैंक घोटाले पर सरकार का हंटर; ₹30.51 करोड़ की हेराफेरी में FIR, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किया ED जांच का स्वागत
Relief For Farmers: शंकरगढ़, कुसमी और रामानुजगंज के 497 दागी समितियों के पीड़ित किसानों को बड़ी राहत, दोबारा शुरू हुआ खाद-बीज का वितरण

Ambikapur Co-Operative Scam (अंबिकापुर सहकारी बैंक घोटाला): छत्तीसगढ़ में सहकारिता के नाम पर किसानों के हक का पैसा डकारने वाले भ्रष्ट तंत्र और सफेदपोशों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़क सर्जिकल स्ट्राइक की है। सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की विभिन्न महत्वपूर्ण शाखाओं और समितियों में बीते वर्षों में हुए करोड़ों रुपये के काले खेल और महाघोटाले का पर्दाफाश होने के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री के कड़े तेवरों के बाद बैंक प्रशासन और सहकारिता विभाग ने प्रभावित किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अंबिकापुर सहकारी बैंक के तहत आने वाली शंकरगढ़, कुसमी, रामानुजगंज तथा रामचंद्रपुर क्षेत्र की प्राथमिक कृषि साख समितियों में वर्ष 2020-21 से लेकर वर्ष 2023-24 (यानी पिछले चार वित्तीय वर्षों) के दौरान बड़े पैमाने पर गंभीर वित्तीय अनियमितताएं, फर्जीवाड़ा और खुलेआम गबन के मामले सामने आए थे। इस पूरे मामले को लेकर कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के विशेष हस्तक्षेप और उनकी संवेदनशीलता के बाद अब प्रभावित व पीड़ित क्षेत्रों के सैकड़ों किसानों को एक बहुत बड़ी राहत मिली है। सरकार ने संकट के दौर से गुजर रहे इन वनांचल क्षेत्रों में दोबारा से रासायनिक खाद और उन्नत बीजों का वितरण युद्ध स्तर पर शुरू करवा दिया है।
इस पूरे महाघोटाले के स्याह पहलू को देखें तो जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर की इन चार प्रमुख ब्लॉक स्तर की समितियों में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं ने सुदूर अंचलों में रहने वाले सीधे-साधे आदिवासी और ग्रामीण किसानों की कमर तोड़कर रख दी थी। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण हुए इस गबन की वजह से वास्तविक किसानों को खरीफ और रबी सीजन की बुआई के ऐन वक्त पर न तो बैंक से आवश्यक नगद अल्पकालीन कृषि ऋण मिल पा रहा था और न ही सोसायटियों से समय पर खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही थी। इसके कारण पूरे सरगुजा संभाग के किसानों के बीच सरकार और सहकारी व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश और घोर असंतोष का माहौल निर्मित हो गया था। इस गंभीर और संवेदनशील मामले को विपक्ष द्वारा भी लगातार उछाला जा रहा था, लेकिन वर्तमान साय सरकार ने मामले की जड़ तक पहुंचकर दोषियों को बेनकाब करने का फैसला किया।
प्रकरण की भीषण गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार के गृह और सहकारिता विभाग के निर्देश पर बैंक प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए दोषी अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों के विरुद्ध संबंधित थानों में नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी है। इसके साथ ही, आरोपियों के खिलाफ कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। प्राथमिक जांच में संलिप्तता पाए जाने के कारण कई प्रभारियों, प्रबंधकों और लिपिकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस और विभागीय ऑडिट की संयुक्त जांच में जो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार इन प्रभावित शाखाओं और सोसायटियों से जुड़े लगभग 497 छोटे-बड़े किसानों के नाम पर या उनके खातों में हेराफेरी करके कुल 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की भारी वित्तीय अनियमितता और बोगस लोनिंग को अंजाम दिया गया है। जांच टीम का मानना है कि जैसे-जैसे फाइलों की पड़ताल आगे बढ़ेगी, घोटाले की यह रकम और अधिक बढ़ सकती है।
एक तरफ जहां दोषियों की धरपकड़ और कानूनी फंदा कसने का काम चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने पीड़ित अन्नदाताओं को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से एक बेहद त्वरित और पारदर्शी कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की है। सरकार ने संबंधित सोसायटियों के प्रशासकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी देरी के वास्तविक और पात्र किसानों की एक नई फ्रेश सूची तैयार करें और उसे तुरंत बैंक के संभागीय मुख्यालय को प्रेषित करें। मुख्यालय स्तर पर इस सूची का मिलान होते ही पात्र किसानों के लिए नए सिरे से लोन स्वीकृति (ऋण मंजूरी) और वितरण की डिजिटल प्रक्रिया अत्यंत तेजी से शुरू की जा रही है, ताकि मानसून और आगामी कृषि सीजन के दौरान किसानों को खेतों में डालने के लिए आवश्यक खाद, बीज और अन्य जरूरी सरकारी सुविधाएं बिना किसी रुकावट के सही समय पर ऑन-स्पॉट मिल सकें।
इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने राजधानी रायपुर में बयान जारी कर कहा कि उनकी सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेश के अन्नदाताओं को हर संभव सहूलियत प्रदान करना और उनकी कृषि गतिविधियों को बिना किसी व्यवधान के निर्बाध बनाए रखना है। उन्होंने भ्रष्टाचारियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि सहकारी संस्थाओं में किसी भी स्तर पर होने वाली वित्तीय अनियमितता या लापरवाही को कतई बर्दाश्त (Zero Tolerance) नहीं किया जाएगा। किसानों के खून-पसीने की कमाई और उनके संवैधानिक हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ जेल भेजने की सख्त वैधानिक कार्रवाई अनवरत जारी रहेगी। कृषि मंत्री नेताम ने एक और बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक धमाका करते हुए बताया कि इस पूरे 30 करोड़ से अधिक के कोऑपरेटिव स्कैम की जांच अब देश की प्रीमियर केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी की जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से ईडी की इस एंट्री और जांच का पूरे दिल से स्वागत किया है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि केंद्रीय एजेंसी की निष्पक्ष और गहरी जांच से इस पूरे घोटाले के पीछे छिपे असली मगरमच्छों और मास्टरमाइंड्स का चेहरा जनता के सामने आ जाएगा।
मंत्री रामविचार नेताम ने अंत में कहा कि राज्य सरकार द्वारा त्वरित रूप से उठाए गए इन कड़े और सुधारात्मक कदमों के कारण सरगुजा संभाग के प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के भीतर शासन-प्रशासन के प्रति खोया हुआ भरोसा एक बार फिर से बहाल हुआ है। सोसायटियों के तालों के खुलने और खाद-बीज वितरण व्यवस्था के सुचारू रूप से पुनः संचालित होने से हजारों आदिवासी किसान परिवारों ने राहत की सांस ली है। इस प्रशासनिक कसावट से आगामी खरीफ फसल सीजन की तैयारियों को एक नई और सकारात्मक गति मिली है। सरकार का यह साफ और स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ में सुशासन के दौर में किसानों के हितों की रक्षा करना और पूरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।



