छत्तीसगढ़

Balidan Diwas 2026: ‘एक देश में दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ के प्रणेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

National Unity Pillar: श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी, मुख्यमंत्री निवास में हुआ गरिमामय आयोजन

NV News रायपुर- Shyama Prasad Mukherjee Balidan Diwas (श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस): स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश की सांस्कृतिक अस्मिता, अखंडता और संप्रभुता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान सेनानियों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। वे एक ऐसे अद्वितीय राजनेता, प्रख्यात शिक्षाविद् और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक थे, जिन्होंने तात्कालिक सत्ता के तुष्टिकरण और गलत नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। आज 23 जून 2026 को उनके पावन बलिदान दिवस (पुण्यतिथि) के अवसर पर पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी उन्हें अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ नमन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश की एकता और अखंडता के इस महान पुरोधा को याद करते हुए राजधानी रायपुर स्थित अपने शासकीय मुख्य निवास कार्यालय में एक अत्यंत गरिमामय और श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैलचित्र पर पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर और पुष्प गुच्छ व पुष्पांजलि अर्पित कर छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस भावुक और प्रेरणादायी क्षण पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान और उनके महान व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यंत गर्व के साथ कहा कि डॉ. मुखर्जी भारत माता के उन चुनिंदा सच्चे सपूतों में से एक थे, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आंतरिक एकता के सशक्त प्रहरी के रूप में जीवन भर डटे रहे। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन और उनका संघर्ष केवल तत्कालीन राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका हर एक कदम भावी पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित भारत की नींव रखने की दिशा में था। उन्होंने कश्मीर के पूर्ण विलय और वहां से अलग कानून व अलग झंडे की व्यवस्था को खत्म करने के लिए जो ऐतिहासिक नारा दिया था और जिसके लिए उन्होंने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे अमूल्य और ऐतिहासिक धरोहर है। उनके यही विचार, कड़ा संघर्ष और सर्वोच्च त्याग आज के आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आजाद भारत के प्रथम उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के औद्योगिक विकास की जो ठोस नीतियां बनाई थीं, उसी के कारण भारत आज औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वे न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ थे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय था। बहुत ही कम उम्र में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) बने थे, जहां उन्होंने भारतीय भाषाओं और आधुनिक शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए क्रांतिकारी कार्य किए। राजनीति में आने के बाद उन्होंने हमेशा वैचारिक शुचिता और सिद्धांतों की राजनीति को बढ़ावा दिया। उनका मानना था कि राष्ट्र की अखंडता और उसकी सांस्कृतिक विरासत के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश ‘विकसित भारत’, ‘सशक्त भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. मुखर्जी के आदर्श, उनकी नीतियां और उनके अटूट सिद्धांत हमें हर कदम पर निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके राष्ट्र प्रथम (Nation First) के विचारों को अपने जीवन और कार्यप्रणाली में आत्मसात करके ही हम एक समृद्ध समाज और मजबूत राष्ट्र के संकल्प को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकते हैं।

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रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस विशेष श्रद्धांजलि सभा के दौरान छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौरभ सिंह, राम गर्ग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि शामिल थे। इन सभी उपस्थित जनों ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रवाद भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर हर भारतीय के दिल को जोड़ने वाला था और छत्तीसगढ़ सरकार उनके बताए जन-कल्याण के सिद्धांतों को अपनी नीतियों के माध्यम से धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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